आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में इस समय चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) को लेकर डर और सतर्कता दोनों का माहौल है।
भारत मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि मोंथा तूफान 28 अक्टूबर की रात या 29 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश तट से टकरा सकता है। इसके चलते कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, ट्रेनें और फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं, जबकि राहत और बचाव दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कहां और कब टकराएगा चक्रवात मोंथा?
IMD के अनुसार, चक्रवात मोंथा वर्तमान में बंगाल की खाड़ी के मध्य क्षेत्र में सक्रिय है और यह तेजी से पश्चिम-उत्तर दिशा में बढ़ रहा है।
अगले 12 घंटों में इसके गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में बदलने की संभावना जताई गई है।
यह आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम और मछलीपट्टनम के बीच सोमवार देर रात या मंगलवार सुबह तक टकरा सकता है।
स्कूल और कॉलेज बंद
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में स्कूल-कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है।
राज्य सरकारों ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिन इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, वहां पहले से ही छुट्टी घोषित कर दी गई है।
ट्रेन और फ्लाइट्स पर असर
चक्रवात मोंथा के कारण रेलवे और एयरलाइंस सेवाओं पर भी गहरा असर पड़ा है।
पूर्वी तट रेलवे ने 25 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया है और कुछ ट्रेनों का रूट डायवर्ट किया गया है।
वहीं, विशाखापट्टनम और भुवनेश्वर एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली कई फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं।
यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट या ट्रेन की स्थिति की जानकारी ले लें।
NDRF और SDRF टीमें तैनात
संभावित खतरे को देखते हुए, NDRF और SDRF की 40 से अधिक टीमें तैनात कर दी गई हैं।
तटीय जिलों जैसे श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापट्टनम और गंजाम में राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरी तैयारी की गई है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि बाढ़ संभावित इलाकों में नावें, सैंडबैग और मेडिकल टीमें पहले से भेजी जा चुकी हैं।
कितनी तेज चलेंगी हवाएं और कितनी होगी बारिश?
IMD ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि तूफान के दौरान हवाओं की रफ्तार 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
इसके साथ ही भारी से अति भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) की संभावना है।
तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठेंगी, इसलिए मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
इन राज्यों में रहेगा अलर्ट
1. आंध्र प्रदेश: कलिंगपट्टनम, श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापट्टनम
2. ओडिशा: गंजाम, पुरी, केंद्रपाड़ा, बालासोर
3. पश्चिम बंगाल: दीघा, मेदिनीपुर और सुंदरबन क्षेत्र
इन सभी जिलों में ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घरों से बाहर न निकलें और तटीय इलाकों से दूर रहें।
सरकार और प्रशासन की तैयारी
राज्य सरकारों ने कंट्रोल रूम्स सक्रिय कर दिए हैं और हर घंटे स्थिति की निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी स्थिति में राहत सामग्री की कमी न हो।
साइक्लोन शेल्टर्स (Cyclone Shelters) को खोला जा चुका है, जहां हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
लोगों के लिए जरूरी एडवाइजरी
समुद्र किनारे या निचले इलाकों में न जाएं।
बिजली के पोल, पेड़ों या ढीली संरचनाओं से दूर रहें।
सरकार और मौसम विभाग की हर अपडेट पर नजर रखें।
आवश्यक सामान और दवाइयां पहले से तैयार रखें।
मोबाइल चार्ज रखें और आपातकालीन नंबर नोट करें।
अगले 48 घंटे बेहद अहम
IMD ने कहा है कि अगले 48 घंटे इस तूफान के लिए निर्णायक साबित होंगे।
अगर मोंथा अपनी दिशा नहीं बदलता तो यह दक्षिण-पूर्वी भारत के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचा सकता है।
हालांकि राहत की बात यह है कि यह तूफान धीरे-धीरे कमजोर भी हो सकता है जब यह जमीन पर प्रवेश करेगा।
चक्रवात ‘मोंथा’ एक गंभीर प्राकृतिक आपदा बन सकता है, लेकिन सरकार, NDRF और मौसम विभाग की तैयारियों से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
सतर्कता ही सुरक्षा है — यही इस वक्त सबसे बड़ा संदेश है।

