By: Vikash Kumar( Vicky)
भारतीय घरों में दादी-नानी की कहानियों और पहेलियों का अलग ही आनंद होता है। ये पहेलियां सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि हमारी सोचने-समझने की क्षमता को भी तेज करती हैं। ऐसी ही एक लोकप्रिय और दिलचस्प पहेली है —
“दूध का पोता, दही का बच्चा बताओ क्या?”
पहली बार सुनते ही यह सवाल दिमाग को उलझा देता है, लेकिन इसका जवाब उतना ही सरल और मजेदार है।

पहेली का मतलब क्या है?
इस पहेली में रिश्तों के नाम का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। दूध और दही दोनों ही हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े खाद्य पदार्थ हैं। दूध से दही बनता है, यानी दही दूध का ‘बच्चा’ हुआ। अब सवाल यह है कि दूध का पोता और दही का बच्चा आखिर क्या हो सकता है?
दिमाग लगाइए, जवाब करीब है
अगर दूध से दही बनता है और दही से आगे कोई चीज बनती है, तो वही दूध का पोता और दही का बच्चा कहलाएगा। भारतीय रसोई में दही से बनने वाली सबसे आम और मशहूर चीज है — मक्खन।
सही जवाब
इस पहेली का सही और मजेदार जवाब है — मक्खन।
दूध से दही बनता है और दही को मथने पर मक्खन निकलता है। इसी रिश्ते के आधार पर मक्खन को दूध का पोता और दही का बच्चा कहा गया है।
क्यों खास हैं दादी मां की पहेलियां
दादी मां की पहेलियां पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इनमें शब्दों का खेल, तर्क और जीवन से जुड़े उदाहरण होते हैं, जो बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आते हैं। ऐसी पहेलियां न सिर्फ परिवार के साथ हंसी-मजाक का मौका देती हैं, बल्कि याददाश्त, तर्कशक्ति और एकाग्रता को भी मजबूत करती हैं।

आज के दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक
मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में भी दादी मां की पहेलियां अपनी जगह बनाए हुए हैं। ये पहेलियां बच्चों को स्क्रीन से दूर रखकर सोचने की आदत डालती हैं और परिवार के बीच संवाद को बढ़ावा देती हैं।
यह लेख सामान्य ज्ञान और पारंपरिक लोक पहेलियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना है।

