By: Vikash Kumar (Vicky)
रांची/दावोस: विश्व के सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम-2026 (WEF, दावोस) में झारखंड की ओर से महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष कल्पना मुर्मू सोरेन ने राज्य के महिला-केंद्रित विकास विजन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों और अनुभवों ने न केवल वैश्विक नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि झारखंड के सामाजिक-आर्थिक विकास मॉडल को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दी है।

दावोस में आयोजित इस सत्र में कल्पना सोरेन ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं की गरिमा, संसाधनों पर अधिकार और उनके नेतृत्व को सशक्त बनाना ही सतत और समावेशी विकास की नींव है. उन्होंने बताया कि झारखंड का मॉडल केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक भागीदारी को प्राथमिकता देता है।
जहां अन्य वैश्विक नेता आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर चर्चा कर रहे थे, वहीं सोरेन का ध्यान मूलभूत मानव विकास संकेतकों — गरिमा, अवसर, सामाजिक न्याय और संसाधनों पर अधिकार — पर रहा, जो विकास की असली कसौटी हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आदिवासी और ग्रामीण महिलाएँ पारिवारिक और सामुदायिक जीवन में वर्षों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई हैं, लेकिन उनकी ‘अदृश्य’ मेहनत को सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से मान्यता देने की अब आवश्यकता है।
कल्पना सोरेन ने अपने संबोधन में स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups) की भूमिका को विस्तृत रूप से रेखांकित किया। इन समूहों ने स्थानीय उत्पादन, खाद्य प्रक्रिया उद्योगों और छोटे-मध्यम उद्यमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं में नेतृत्व, आत्म-निर्भरता और आर्थिक क्षमता को गति दी है। ये समूह न केवल व्यवसायिक कौशल विकसित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर समुदाय पर आधारित विकास की मिसाल भी पेश कर रहे हैं।

सोरेन ने कहा कि झारखंड में ‘महिला-केंद्रित’ विकास का दृष्टिकोण, संसाधनों के संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के साथ संतुलित है। उन्होंने बताया कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन के बीच आदिवासी समुदाय का गहरा सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध है। यह विकास मॉडल केवल प्राकृतिक संसाधनों के दोहान पर आधारित नहीं, बल्कि संरक्षण और जिम्मेदारी के सिद्धांत पर आधारित है।
सत्र के दौरान कल्पना सोरेन ने स्पष्ट किया कि जब तक महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, वित्तीय संसाधन और सामाजिक मान्यता नहीं मिलेगी, तब तक कोई भी रणनीति पूर्ण नहीं मानी जा सकती। उनका जोर महिला एजेंसी (agency), उनके निर्णय लेने की शक्ति और रोजगार सृजन पर रहा। उन्होंने वैश्विक साझेदारों को झारखंड के इस विकास मॉडल का हिस्सा बनने और महिला-नेतृत्व वाले सामुदायिक परियोजनाओं का अनुभव करने का निमंत्रण दिया।
इस वैश्विक मंच पर झारखंड की भागीदारी अलग-सी रही, क्योंकि राज्य की आधी आबादी — महिलाएं — अब अपने स्वयं के नेतृत्व और विकास की दिशा को विश्व स्तर पर प्रस्तुत कर रही हैं। दावोस में झारखंड की उपस्थिति और इस मंच पर विस्तार से साझा किए गए महिला-केंद्रित विकास विजन ने कई वैश्विक नीति निर्माताओं, निवेशकों और सामाजिक उद्यमियों का ध्यान खींचा है।
विशेष रूप से, सोरेन ने बताया कि कैसे मंईयां सम्मान जैसे राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों ने ग्रामीण महिलाओं को एकजुट किया है और उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाया है। इस मॉडल के माध्यम से महिलाएं न केवल परिवार का समर्थन कर रही हैं, बल्कि स्थानीय बाजारों और आत्मनिर्भर उद्यमों के जरिए आर्थिक योगदान भी दे रही हैं।

उनके इस प्रयास की वैश्विक स्तर पर सराहना दिखाई दे रही है। WEF में झारखंड पवेलियन की भागीदारी और झारखंड के विकास मॉडल को विश्व मंच पर प्रस्तुत किए जाने से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि छोटे-स्तर के सामाजिक नवाचार और महिला-नेतृत्व विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए कितने महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।
महिला-केंद्रित रणनीति का राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व
कल्पना सोरेन के दावोस संबोधन का महत्व केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास नीति के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है। वैश्विक नीति क्षेत्र में इस तरह के विचारों का आदान-प्रदान यह संकेत देता है कि महिला-नेतृत्व वाले विकास मॉडल अब अधिक व्यापक रूप से अपनाए जा सकते हैं।
समग्र रूप से, झारखंड के महिला-केंद्रित विकास दृष्टिकोण ने यह साबित किया है कि जब महिलाएँ अपने सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के साथ सशक्त होती हैं, तो विकास की प्रक्रिया और भी अधिक न्यायसंगत और दीर्घकालिक होती है। WEF जैसे मंच पर इस तरह की पहचान से यह स्पष्ट हो गया है कि स्थानीय समुदायों की विचारधाराएँ और सामुदायिक नेतृत्व वैश्विक नीति दर्शन का हिस्सा बन सकते हैं।

