By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए ताजा बजट में देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रक्षा बजट में रिकॉर्ड 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। माना जा रहा है कि हाल ही में सफल रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सीधा असर इस फैसले में देखने को मिला है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात और सीमाई चुनौतियों को देखते हुए सैन्य ताकत को और मजबूत किया जाएगा।

इस साल का रक्षा बजट अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसमें सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। खास बात यह है कि बजट का बड़ा हिस्सा आधुनिक हथियार प्रणालियों, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और अत्याधुनिक तकनीक के विकास पर खर्च किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर ने बदली रणनीति
ऑपरेशन सिंदूर को देश की सैन्य रणनीति के लिहाज से एक अहम मोड़ माना जा रहा है। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने तकनीक, खुफिया जानकारी और त्वरित कार्रवाई का बेहतरीन तालमेल दिखाया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन ने यह साफ कर दिया कि भविष्य की लड़ाइयां केवल संख्या से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता से जीती जाएंगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए भी बजट में बड़ी बढ़ोतरी की है। ड्रोन तकनीक, साइबर वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस डिफेंस जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है।

स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
डिफेंस बजट में बढ़ोतरी का एक बड़ा उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देना भी है। सरकार ने घरेलू रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से फंड आवंटित किया है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में अधिकांश हथियार और उपकरण देश में ही बनाए जाएंगे। इसके लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बीच साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सीमाई सुरक्षा पर खास जोर
बजट में सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। सड़कों, सुरंगों, हवाई पट्टियों और लॉजिस्टिक सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। इससे सेना की तैनाती और आपूर्ति व्यवस्था और अधिक सुचारू हो सकेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई चुनौतियों से सबक लेते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सके।

जवानों की सुविधाओं में इजाफा
डिफेंस बजट में बढ़ोतरी का लाभ केवल हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने जवानों के वेतन, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास सुविधाओं के लिए भी अतिरिक्त धनराशि तय की है। इससे सशस्त्र बलों के मनोबल को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किया गया है, जिससे पूर्व सैनिकों को राहत मिलेगी।
राजनीतिक और रणनीतिक संदेश
विश्लेषकों के मुताबिक, रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी केवल आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक मजबूत रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी है। यह संकेत देता है कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।
विपक्ष ने हालांकि बजट के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, लेकिन कुल मिलाकर रक्षा विशेषज्ञों ने इसे समय की जरूरत बताया है।

भविष्य की तैयारियों की झलक
कुल मिलाकर, इस बार का रक्षा बजट यह साफ करता है कि ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने भविष्य की चुनौतियों के लिए ठोस तैयारी शुरू कर दी है। तकनीक, स्वदेशी उत्पादन और मानव संसाधन पर समान रूप से ध्यान देकर भारत अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में देश की सुरक्षा नीति की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

