दिल्ली में एयर पॉल्यूशन ने एक बार फिर हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। जहरीली हवा के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है, अस्पतालों में सांस और आंखों से जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं और बुजुर्गों व बच्चों के लिए खतरा लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई का ऐलान किया है। सरकार ने मजदूरों, वाहन चालकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए कई अहम घोषणाएं करते हुए साफ कहा है कि दिल्ली की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

वॉर मोड में सरकार, टास्क फोर्स का गठन
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दिल्ली में बढ़ते एयर पॉल्यूशन को देखते हुए एक हाई-लेवल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स 24×7 आधार पर काम करेगी और प्रदूषण के हर स्रोत—निर्माण कार्य, वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और कूड़ा जलाने—पर सख्ती से कार्रवाई करेगी। CM ने कहा कि यह सिर्फ घोषणाओं का समय नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर असर दिखाने का समय है।
मजदूरों के लिए राहत और सुरक्षा
सरकार ने निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए खास राहत पैकेज की घोषणा की है। जिन इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच चुका है, वहां खुले निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही मजदूरों को आर्थिक सहायता दी जाएगी ताकि उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी निर्माण स्थलों पर मजदूरों को मास्क, सेफ्टी किट और स्वच्छ पानी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
वाहन चालकों पर सख्ती, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा
दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) के वाहन चलाने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
इसके साथ ही सरकार ने लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। बसों और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने का फैसला लिया गया है ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके। CM ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर कम वाहन होंगे, तभी हवा साफ होगी।
नौकरीपेशा लोगों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सलाह
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने निजी और सरकारी दफ्तरों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा देने की सलाह दी है। खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था लागू करने को कहा गया है जिन्हें दफ्तर आने-जाने में लंबा सफर तय करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे न केवल ट्रैफिक कम होगा, बल्कि लोगों की सेहत भी सुरक्षित रहेगी। स्कूलों और कॉलेजों को भी हालात के अनुसार ऑनलाइन कक्षाएं चलाने पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को किया गया अलर्ट
दिल्ली के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सांस, दमा और एलर्जी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों के लिए विशेष वार्ड और दवाइयों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी कर लोगों से अपील की गई है कि किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत संपर्क करें।
प्रदूषण के खिलाफ जनभागीदारी पर जोर
रेखा गुप्ता सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ सरकारी प्रयासों से ही प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं है। इसके लिए जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। लोगों से अपील की गई है कि कूड़ा न जलाएं, अनावश्यक वाहन न चलाएं और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाएं।
सरकार ने जल्द ही एक जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा भी की है, जिसके तहत स्कूलों, कॉलोनियों और बाजारों में लोगों को प्रदूषण के खतरों और उससे बचाव के तरीकों के बारे में बताया जाएगा।
सख्त निगरानी और रोजाना समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि एयर पॉल्यूशन की स्थिति की रोजाना समीक्षा की जाएगी। हर विभाग को टारगेट दिया गया है और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। CM ने कहा, “दिल्ली की हवा को साफ करना हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी।”
दिल्ली में एयर पॉल्यूशन से निपटने के लिए रेखा गुप्ता सरकार का यह वॉर मोड ऐलान आने वाले दिनों में कितना असर दिखाता है, यह देखना अहम होगा। फिलहाल मजदूरों, वाहन चालकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए की गई ये घोषणाएं राहत भरी जरूर हैं। अगर सरकार और जनता मिलकर प्रयास करें, तो दिल्ली को फिर से साफ हवा की ओर ले जाया जा सकता है।
