By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली: एक नई स्वास्थ्य रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि दिल्ली में पुरुषों में कैंसर की दर देश के सभी महानगरों में सबसे ज्यादा है, जिससे राजधानी अब देश की “कैंसर कैपिटल” के रूप में उभरती नजर आ रही है। यह रिपोर्ट JAMA Network Open में प्रकाशित भारत के 43 कैंसर रजिस्ट्री केंद्रों के विश्लेषण पर आधारित है, जिसमें दिल्ली का आयु-अनुकूलित कैंसर दर (AAIR) पुरुषों में लगभग 146 प्रति 1,00,000 है — जो अन्यmetros से कहीं अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2024 में लगभग 1.56 मिलियन नए कैंसर मामले दर्ज किए गए, जिसमें पुरुषों के लिए कुल 780,822 मामले रिपोर्ट हुए और राष्ट्रीय स्तर पर पुरुषों का कैंसर जोखिम भी लगातार बढ़ रहा है।

दिल्ली-पुरुष कैंसर का चिंताजनक परिदृश्य
दिल्ली के कैंसर रजिस्ट्री डेटा से पता चलता है कि पुरुषों में मुख्यतः तीन प्रकार के कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं:
ओरल कैंसर: सबसे अधिक मामलों में शामिल, मुख्य रूप से तंबाकू चबाने और पान-गुटखा सेवन से संबंधित।
लंग (फेफड़े) कैंसर: प्रदूषण और धूम्रपान जैसी पर्यावरणीय तथा जीवनशैली वजहों से बढ़ रहा है।
प्रोस्टेट कैंसर: उम्र बढ़ने और जीवनशैली से जुड़ी वजहों की वजह से पुरुषों में प्रमुख है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये कैंसर न केवल राजधानी के निवासियों में बढ़ रहे हैं, बल्कि एक युवा आबादी में भी तेजी से देखे जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता और बढ़ गई है।

मुख्य जोखिम कारण:
पर्यावरण और जीवनशैली
विश्लेषण से यह भी स्पष्ट होता है कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
* हवा-प्रदूषण: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अक्सर खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स दर्ज होता है, जो फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
* तंबाकू का सेवन: सिगरेट, हुक्का, पान-गुटखा के सेवन के कारण मुंह तथा गले के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
* जीवनशैली: अस्वस्थ खान-पान, अधिक तली-भुनी चीज़ों का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव जीवनशैली जोखिमों को और बढ़ा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण और तंबाकू के खतरे का संयुक्त प्रभाव वायु-मार्ग और मुँह के कैंसर के मामलों में वृद्धि का एक मुख्य कारण है और इसे रोकने के लिए जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव जरूरी है।

Screening और रोकथाम
कैंसर के इलाज में प्रारंभिक पहचान और नियमित स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैंसर का पता शुरुआती चरणों में लग जाता है, तो इलाज संभव है और रोगी की जीवन-अवधि बढ़ सकती है।सरकारी स्वास्थ्य विभाग भी नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन और कंट्रोल ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (NP-NCD) के तहत स्क्रीनिंग और जागरूकता योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगो को ओरल, ब्रेस्ट और सिविक्स कैंसर के लिए नियमित जांच की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा, कैंसर नियंत्रण के लिए सरकारी योजनाओं में नई डे-केयर कैंसर सेंटरों की स्थापना, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सुविधाओं का विस्तार, और लोगों को जोखिम कारकों के प्रति जागरूक करना शामिल है।

दिल्ली के डेटा का राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
हालांकि दिल्ली की कैंसर दर पुरुषों में सबसे अधिक है, देश के अन्य हिस्सों में भी कैंसर का बढ़ता बोझ गंभीर है। भारत में लगभग 11 प्रतिशत लोगों को जीवनभर कैंसर का जोखिम होता है, जो कि विश्लेषण से पता चला है। राष्ट्रीय स्तर पर मुँह, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर मुख्य रूप से पुरुषों में पाए जाते हैं, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट, गर्भाशय ग्रीवा और अंडाशय के कैंसर सबसे आम हैं।

समाधान और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर की इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम जरूरी हैं:
• धूम्रपान तथा तंबाकू सेवन को रोकना
• स्वस्थ खान-पान और नियमित व्यायाम
• प्रदूषण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करना
• समय-समय पर स्क्रीनिंग एवं जागरूकता अभियानों का विस्तार
साथ ही, अस्पतालों और कैंसर केंद्रों में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने तथा चिकित्सा देखभाल सुविधाओं को सुदृढ़ करने की भी सिफारिश की जा रही है।
कैंसर के बढ़ते मामलों का मुकाबला करना राष्ट्रीय स्वास्थ्य की एक बड़ी प्राथमिकता बन चुका है और इसके लिए सामूहिक प्रयास, नीतिगत समर्थन, और लोगों की जागरूकता बेहद आवश्यक है।

