दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-4) की सख्त पाबंदियां लागू होने के बावजूद राजधानी और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 398 दर्ज किया गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के बेहद करीब है। कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

दिल्ली के किन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण?
दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में AQI बेहद खराब स्थिति में दर्ज किया गया। आनंद विहार, अशोक विहार, वजीरपुर, जहांगीरपुरी, मुंडका और बवाना जैसे औद्योगिक और रिहायशी इलाकों में AQI 420 से 460 के बीच रिकॉर्ड किया गया। वहीं, आरके पुरम, द्वारका और लोधी रोड जैसे अपेक्षाकृत खुले इलाकों में भी AQI 350 से ऊपर बना हुआ है।
एनसीआर के शहरों की बात करें तो गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम की स्थिति भी दिल्ली से बेहतर नहीं है। गाजियाबाद में AQI 410, नोएडा में 395 और फरीदाबाद में 380 के आसपास दर्ज किया गया है।
GRAP-4 लागू, फिर भी क्यों नहीं सुधर रही हवा?
दिल्ली-एनसीआर में GRAP-4 के तहत कई सख्त कदम लागू किए गए हैं। इनमें निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूरी तरह रोक, डीजल वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध, स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस और सरकारी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम जैसे उपाय शामिल हैं। इसके बावजूद प्रदूषण के स्तर में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। उत्तर भारत में चल रही ठंडी हवाओं की कमी, पराली जलाने से उठता धुआं, वाहनों की भारी आवाजाही और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत—इन सबका संयुक्त असर हवा को और जहरीला बना रहा है।
मौसम बना रहा है हालात और खराब
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में हवा की रफ्तार बेहद कम है, जिससे प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं। रात के समय तापमान गिरने से ‘इनवर्जन लेयर’ बन रही है, जो प्रदूषण को नीचे ही रोक लेती है। जब तक तेज हवाएं या बारिश नहीं होती, तब तक हालात में सुधार की संभावना कम है।
सेहत पर कितना खतरनाक है AQI 400+?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 400 से ऊपर का AQI बेहद खतरनाक माना जाता है। इस स्तर पर हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 कण सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस व हृदय रोगियों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे हालात में आंखों में जलन, गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और थकान जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लंबे समय तक इस हवा में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
सरकार और प्रशासन क्या कर रहा है?
दिल्ली सरकार और एनसीआर प्रशासन ने प्रदूषण से निपटने के लिए कई आपात कदम उठाए हैं। सड़कों पर पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल, ट्रकों की एंट्री पर सख्ती और प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, लोगों से अपील की जा रही है कि वे निजी वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें।
आप कैसे कर सकते हैं खुद का बचाव?
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक AQI गंभीर श्रेणी में है, तब तक लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। बाहर निकलते समय N95 या उससे बेहतर मास्क का इस्तेमाल करें। सुबह और देर रात खुले में टहलने से बचें। घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और खिड़की-दरवाजे बंद रखें। बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से बाहर न जाने दें।
आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में हवा की गति में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे प्रदूषण में थोड़ी राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, जब तक कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ या बारिश नहीं होती, तब तक दिल्ली-एनसीआर के लोगों को ‘जहरीली हवा’ से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल है।
