नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (Noida, Gurugram, Ghaziabad, Faridabad) के लोगों को शुक्रवार सुबह राहत की हल्की सांस मिली। कई दिनों से ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हो रही वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया है। आज दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 से नीचे पहुंच गया, जो ‘मध्यम से खराब’ श्रेणी के बीच माना जाता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और आने वाले दिनों में हालात फिर बिगड़ सकते हैं।
गुरुवार को स्थिति थी बेहद खराब
गुरुवार को दिल्ली का औसत AQI 392 तक पहुंच गया था, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब है। कई इलाकों जैसे आनंद विहार, जहांगीरपुरी, बवाना, वजीरपुर और आईटीओ में हवा इतनी खराब थी कि दृश्यता भी प्रभावित हुई। वहीं आज शुक्रवार सुबह हवा की दिशा और गति में बदलाव के कारण हल्का सुधार दर्ज किया गया।
AQI में सुधार की वजह क्या है?
मौसम विभाग (IMD) और सफर (SAFAR-India) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के चलते हवा की रफ्तार थोड़ी बढ़ी है जिससे प्रदूषक तत्वों का फैलाव हुआ। इसके अलावा, रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी भी हुई जिससे प्रदूषण का स्तर नीचे आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश या तेज हवाएं अगर जारी रहीं तो अगले 24-48 घंटों में AQI और भी बेहतर हो सकता है।
कौन-कौन से क्षेत्र अब भी प्रदूषित हैं?
भले ही औसत AQI में सुधार दिखा हो, लेकिन दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में हवा अब भी खराब है। नोएडा में AQI 242, गाजियाबाद में 256, जबकि गुरुग्राम में 210 दर्ज किया गया। दिल्ली के बवाना और आनंद विहार में यह आंकड़ा 280 के आसपास बना हुआ है।
सरकार ने उठाए कदम
दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण को फिलहाल जारी रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि निर्माण कार्यों पर पाबंदी जारी रहेगी और स्कूलों में आउटडोर गतिविधियों को सीमित रखा जाएगा।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, “प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। हम लोगों से अपील करते हैं कि गाड़ियों का कम इस्तेमाल करें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें और कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों से बचें।”
स्वास्थ्य पर असर अब भी बरकरार
डॉक्टरों का कहना है कि AQI भले ही 200 के नीचे आया हो, लेकिन यह अब भी संवेदनशील लोगों के लिए खतरनाक है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या हार्ट पेशेंट्स को खास सावधानी बरतनी चाहिए।
AIIMS की पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नीरजा कुमार कहती हैं, “AQI 200 से नीचे आने के बावजूद हवा में सूक्ष्म कण (PM2.5) का स्तर WHO मानक से चार गुना ज्यादा है। लंबे समय तक ऐसी हवा में रहना फेफड़ों और दिल पर असर डाल सकता है।”
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
IMD के मुताबिक, अगले दो दिनों तक हल्की धुंध बनी रह सकती है। शनिवार को हवा की रफ्तार कम होने से AQI में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। 3 से 5 नवंबर के बीच मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं फिर बढ़ीं तो हवा की गुणवत्ता दोबारा ‘गंभीर’ हो सकती है।
लोगों की राय
राजधानी के नागरिकों का कहना है कि सुबह-सुबह टहलने जाना मुश्किल हो गया है। लाजपत नगर निवासी सीमा अग्रवाल ने बताया, “हमने बच्चों को सुबह बाहर खेलने से मना किया है। आंखों में जलन और गले में खराश महसूस हो रही है।”
वहीं, गुरुग्राम के राहुल वर्मा कहते हैं, “आज थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन ये स्थायी नहीं लगती। हर साल यही स्थिति होती है।”
एक नजर में AQI स्तर की श्रेणियां
AQI स्तर श्रेणी प्रभाव
0–50 अच्छा स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं
51–100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों पर हल्का असर
101–200 मध्यम सांस और दिल के मरीजों पर असर
201–300 खराब बच्चों और बुजुर्गों के लिए हानिकारक
301–400 बहुत खराब स्वास्थ्य पर गंभीर असर
401–500 गंभीर आपात स्थिति जैसी स्थिति
दिल्ली-NCR में आज भले ही हवा थोड़ी साफ महसूस हो रही हो, लेकिन प्रदूषण का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। यह राहत अल्पकालिक है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि जब तक ठोस दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए जाते — जैसे कि पराली जलाने पर नियंत्रण, वाहनों से निकलने वाले धुएं को सीमित करना और औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त निगरानी — तब तक दिल्ली की हवा में ‘जहर’ कम नहीं होगा।

