By: Vikash Kumar (Vicky)
दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए नए साल की शुरुआत भी राहत भरी नहीं रही। साल 2026 के पहले ही दिन राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता (Air Quality Index) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। औसत Delhi AQI करीब 380 रिकॉर्ड किया गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद चिंताजनक माना जाता है। प्रदूषण के साथ-साथ कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

नए साल के शुरुआती दिनों में भी दिल्ली-एनसीआर स्मॉग की चादर में लिपटा नजर आया। सुबह और रात के समय हालात और ज्यादा खराब रहे। कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम हो गई, जिससे सड़क और रेल यातायात पर भी असर पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की स्थिरता, कम हवा की रफ्तार और नमी की अधिकता के चलते प्रदूषक कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं।
इन इलाकों में AQI बेहद खराब
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में AQI 350 से ऊपर दर्ज किया गया। आनंद विहार, जहांगीरपुरी, मुंडका, रोहिणी और द्वारका जैसे इलाकों में स्थिति ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ के करीब बनी रही। एनसीआर के शहरों—नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम—में भी हालात कुछ खास बेहतर नहीं रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा सामान्य से कई गुना ज्यादा पाई गई। ये कण फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को बढ़ाते हैं, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए।
ठंड ने बढ़ाई परेशानी
प्रदूषण के साथ-साथ कड़ाके की ठंड भी दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। ठंडी हवाओं और कोहरे की वजह से सुबह-शाम बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कई इलाकों में लोग अलाव और हीटर का सहारा लेते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक ठंड से ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हवा की रफ्तार धीमी रहने के कारण प्रदूषण के स्तर में भी ज्यादा सुधार के आसार कम हैं।
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की खराब हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत और खांसी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अस्थमा और फेफड़ों के मरीजों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि जब तक जरूरी न हो, घर से बाहर निकलने से बचें। बाहर निकलते समय N95 मास्क का इस्तेमाल करें और बच्चों व बुजुर्गों को विशेष रूप से सुरक्षित रखें।

लागू हैं सख्त पाबंदियां
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के तहत कई सख्त कदम लागू किए गए हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध और भारी वाहनों की एंट्री पर नियंत्रण जैसे उपाय जारी हैं। सरकार और प्रशासन की ओर से यह भी अपील की गई है कि लोग निजी वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। इसके अलावा, खुले में कूड़ा जलाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
स्कूल और ऑफिस जाने वालों की मुश्किलें
घने कोहरे और खराब हवा के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों और ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के समय दृश्यता कम होने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी रही। माता-पिता अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित नजर आए, वहीं बुजुर्गों को सुबह की सैर छोड़नी पड़ी।
कब मिलेगी राहत?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पश्चिमी विक्षोभ या तेज हवाएं चलती हैं तो प्रदूषण से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल अगले कुछ दिनों तक हालात ज्यादा बदलने की संभावना नहीं है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
नए साल की शुरुआत में ही दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण और ठंड के इस दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में मौसम के बदलने के साथ हालात कुछ बेहतर होंगे।
