By : Vikash Kumar ( Vicky )
दिल्ली-एनसीआर में टोल नाकों पर लगने वाला लंबा जाम अब सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह बढ़ते वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह बनता जा रहा है। राजधानी दिल्ली समेत नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा के टोल प्लाजा रोजाना लाखों वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। खासकर सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में टोल नाकों पर कई-कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे लोगों का समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण को और खतरनाक बना देता है।
टोल नाकों पर क्यों लगता है इतना जाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, टोल प्लाजा पर जाम की सबसे बड़ी वजह वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी है। दिल्ली-एनसीआर में हर दिन लाखों निजी और व्यावसायिक वाहन प्रवेश करते हैं। इसके अलावा, कई टोल नाकों पर फास्टैग लेन की संख्या कम होने, तकनीकी खराबी, बैलेंस न होने या मैनुअल जांच के कारण भी ट्रैफिक रुक जाता है। कई बार एक वाहन की समस्या सैकड़ों गाड़ियों को रोक देती है।

प्रदूषण पर पड़ रहा सीधा असर
दिल्ली पहले ही देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। ऐसे में टोल नाकों पर खड़े हजारों वाहन प्रदूषण को और गंभीर बना रहे हैं। ट्रैफिक जाम में फंसे वाहनों के इंजन चालू रहते हैं, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पीएम 2.5 जैसे खतरनाक कण हवा में घुल जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक टोल प्लाजा पर लगने वाला जाम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को कई गुना बढ़ा देता है।
आम लोगों की परेशानी बढ़ी
टोल नाकों पर जाम का असर सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है। रोज ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल बसों, एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई लोग घंटों जाम में फंसे रहने की शिकायत करते हैं। वाहन चालकों का कहना है कि कभी-कभी टोल पार करने में 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है।
फास्टैग के बावजूद क्यों नहीं मिल रही राहत?
सरकार ने टोल पर जाम कम करने के लिए फास्टैग को अनिवार्य किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। कई टोल प्लाजा पर फास्टैग स्कैनर ठीक से काम नहीं करते या नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा, कुछ वाहन चालक अब भी नियमों का पालन नहीं करते, जिससे ट्रैफिक बाधित होता है।
प्रशासन और सरकार के सामने चुनौती
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर पहले ही कई पाबंदियां लागू की जा चुकी हैं, लेकिन टोल नाकों पर जाम की समस्या अब भी बनी हुई है। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन समय-समय पर व्यवस्थाएं सुधारने का दावा करते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल अस्थायी उपायों से यह समस्या खत्म नहीं होगी।
संभावित समाधान क्या हो सकते हैं?
विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि टोल नाकों पर जाम और प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
फास्टैग सिस्टम को पूरी तरह तकनीकी रूप से मजबूत किया जाए
टोल प्लाजा पर लेनों की संख्या बढ़ाई जाए
कुछ व्यस्त टोल नाकों को हटाने या शिफ्ट करने पर विचार हो
पीक ऑवर्स में अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया जाए
पर्यावरण विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टोल नाकों पर जाम को नियंत्रित नहीं किया गया, तो दिल्ली-एनसीआर की हवा आने वाले समय में और जहरीली हो सकती है। उनका मानना है कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और प्रदूषण नियंत्रण को एक साथ जोड़कर नीति बनाई जानी चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर में टोल नाकों पर लगने वाला जाम अब एक गंभीर शहरी और पर्यावरणीय समस्या बन चुका है। यह न केवल लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है, बल्कि प्रदूषण के स्तर को भी खतरनाक हद तक बढ़ा रहा है। ऐसे में सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि जाम से राहत मिले और स्वच्छ हवा का सपना साकार हो सके।
