By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में पीने के पानी को लेकर एक डरावनी सच्चाई सामने आई है। राजधानी के लाखों लोग जिस पानी को रोज़ाना पी रहे हैं, वह कई इलाकों में साफ नहीं बल्कि गंभीर रूप से दूषित है। इसकी सबसे बड़ी वजह दिल्ली की जर्जर और दशकों पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था है। सरकारी आंकड़ों और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में करीब 2800 किलोमीटर पाइपलाइन ऐसी हैं जो 30 साल से भी ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं, जबकि पूरा जल वितरण नेटवर्क 8,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है।

55% पानी रास्ते में ही बर्बाद
दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, राजधानी में सप्लाई होने वाला लगभग 55 प्रतिशत पानी लीकेज, चोरी और खराब पाइपलाइन के कारण बर्बाद हो जाता है। इसका सीधा असर यह है कि लोगों तक या तो पानी पहुंचता ही नहीं, या फिर गंदा और दूषित पानी सप्लाई होता है। कई इलाकों में पानी में बदबू, गंदा रंग और बैक्टीरिया पाए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
दूषित पानी से बढ़ रही बीमारियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पेयजल की वजह से डायरिया, टाइफाइड, पीलिया, त्वचा रोग और पेट से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। खासतौर पर झुग्गी बस्तियों, पुराने रिहायशी इलाकों और अनियमित कॉलोनियों में हालात ज्यादा गंभीर हैं, जहां पानी की पाइपलाइन सीवर लाइनों के बेहद करीब से गुजरती हैं।
30 साल पुरानी पाइपलाइन बन रहीं जानलेवा
दिल्ली की अधिकतर पुरानी पाइपलाइनें लोहे और कास्ट आयरन से बनी हैं, जिनमें समय के साथ जंग लग चुकी है। कई जगहों पर पाइप पूरी तरह से टूट चुके हैं। जब पानी का दबाव कम होता है, तो सीवर का गंदा पानी पाइप में रिसकर सप्लाई लाइन में मिल जाता है। यही कारण है कि कई बार नल से पीला या बदबूदार पानी आता है।
7,000 KM पाइपलाइन बदलेगा जल बोर्ड
दिल्ली जल बोर्ड ने स्वीकार किया है कि समस्या गंभीर है और इसके समाधान के लिए एक मेगा पाइपलाइन रिप्लेसमेंट प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है। योजना के तहत 2 से 3 साल में लगभग 7,000 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन बदली जाएगी। हालांकि, पूरे जल वितरण नेटवर्क को पूरी तरह आधुनिक और सुरक्षित बनाने में कम से कम 8 साल का समय लगने का अनुमान है।

हजारों करोड़ की लागत
इस पूरे प्रोजेक्ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इसमें नई पाइपलाइन बिछाने के साथ-साथ स्मार्ट मीटर, प्रेशर मैनेजमेंट सिस्टम और लीकेज डिटेक्शन टेक्नोलॉजी को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे पानी की बर्बादी कम होगी और लोगों को साफ पेयजल मिलेगा।
किन इलाकों में हालात सबसे खराब?
रिपोर्ट के मुताबिक, पुरानी दिल्ली, ट्रांस यमुना क्षेत्र, पश्चिमी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली और कुछ दक्षिणी दिल्ली के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई जगहों पर लोग मजबूरी में आरओ वाटर या बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
विपक्ष का हमला, सरकार पर सवाल
इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि दिल्ली सरकार और जल बोर्ड ने वर्षों तक पाइपलाइन सुधार पर ध्यान नहीं दिया, जिसका खामियाजा आज जनता भुगत रही है। वहीं सरकार का कहना है कि पिछली सरकारों की लापरवाही के कारण यह समस्या विकराल हुई है और अब इसे चरणबद्ध तरीके से ठीक किया जा रहा है।
जनता की मांग: तुरंत समाधान
दिल्ली के नागरिकों की मांग है कि सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि ग्राउंड लेवल पर तेजी से काम हो। लोगों का कहना है कि जब तक पाइपलाइन पूरी तरह बदली नहीं जाती, तब तक साफ पानी की गारंटी मिलनी चाहिए।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि पाइपलाइन बदलने के साथ-साथ सीवर और जल आपूर्ति नेटवर्क को अलग-अलग रखने, नियमित पानी की गुणवत्ता जांच और पारदर्शी रिपोर्टिंग सिस्टम की भी जरूरत है। तभी दिल्ली को गंदे पानी की इस भयावह समस्या से निजात मिल सकती है।

