By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर: धार्मिक नगरी देवघर में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूजा पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन पर्व के दूसरे दिन पूरे जिले में आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। व्रती महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ दिनभर पूजा की तैयारियों में खुद को समर्पित रखा।

चैती छठ का दूसरा दिन विशेष रूप से स्वच्छता, शुद्धता और नियमों के पालन के लिए जाना जाता है। सुबह की पहली किरण के साथ ही व्रती महिलाएं अपने घर-आंगन की साफ-सफाई में जुट जाती हैं। घर के हर कोने को साफ कर पवित्र बनाया जाता है, क्योंकि छठ पूजा में शुद्धता का विशेष महत्व होता है। यही नहीं, गांव और मोहल्लों में भी सामूहिक रूप से स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें महिलाएं और स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते नजर आए।

इस दिन व्रती महिलाएं पूजा में उपयोग होने वाले अनाज जैसे गेहूं, चावल आदि को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाती हैं। यह प्रक्रिया पूरी सावधानी और नियमों के अनुसार की जाती है, ताकि प्रसाद पूरी तरह से शुद्ध और पवित्र बना रहे। मान्यता है कि छठ पूजा में उपयोग होने वाला हर सामग्री शुद्धता और आस्था का प्रतीक होती है।
दोपहर के समय महिलाओं के समूह गांव के खेतों या निर्धारित स्थानों पर जाते हैं। यहां वे सामूहिक रूप से पूजा की सामग्री तैयार करती हैं। इस दौरान पारंपरिक गीतों की गूंज और महिलाओं के बीच आपसी सहयोग का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है। महिलाएं एक-दूसरे की मदद करती हैं और पूरे उत्साह के साथ छठ पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप देती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा और भी जीवंत रूप में देखने को मिलती है, जहां महिलाएं समूह बनाकर मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाने की तैयारी करती हैं। छठ पूजा में बनाए जाने वाले ठेकुआ, कसार और अन्य प्रसाद को विशेष विधि से तैयार किया जाता है। इस दौरान स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
इस दिन तैयार की गई सामग्री को बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है और उसे छठ पूजा के मुख्य अनुष्ठान के लिए सुरक्षित रखा जाता है। प्रसाद को अत्यंत श्रद्धा के साथ रखा जाता है और इसे किसी भी प्रकार की अशुद्धि से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरती जाती है।

देवघर के विभिन्न क्षेत्रों में इस दिन महिलाओं के बीच सामूहिकता और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। महिलाएं न केवल अपने घर की जिम्मेदारियों को निभाती हैं, बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर इस पर्व को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्यों का प्रतीक भी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चैती छठ पूजा का यह दिन हमें हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि स्वच्छता, अनुशासन और सामूहिकता के माध्यम से हम समाज को बेहतर बना सकते हैं। खासकर युवाओं के लिए यह पर्व एक प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है, जहां वे अपनी परंपराओं को समझते और अपनाते हैं।

प्रशासन की ओर से भी इस दौरान साफ-सफाई और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। घाटों और आसपास के क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

चैती छठ पूजा के दूसरे दिन का यह दृश्य यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी पारंपरिक आस्थाएं और संस्कार आज भी जीवित हैं। देवघर में इस पर्व का उत्साह यह साबित करता है कि यहां के लोग अपनी संस्कृति को संजोए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
आने वाले दिनों में छठ पूजा के मुख्य अनुष्ठान—संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य—को लेकर तैयारियां और भी तेज हो जाएंगी। श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा-अर्चना करेंगे और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

