By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। धार्मिक नगरी देवघर में आज साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस अवसर पर विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विशेष तैयारी की गई है। मंदिर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों ने ग्रहण को लेकर परंपराओं के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की है। श्रद्धालुओं के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी गई है ताकि धार्मिक विधि-विधान में किसी प्रकार की बाधा न आए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी मंदिर में ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है, लेकिन देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर की परंपरा अन्य मंदिरों से भिन्न है। यहां ग्रहण के केवल 2 घंटे पहले ही सूतक काल प्रभावी होता है। यही विशेष परंपरा इस मंदिर को देश के अन्य प्रमुख शिवालयों से अलग पहचान देती है।

4 बजे तक ही होगा जलार्पण
मंदिर प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, आज दोपहर 4:00 बजे तक ही बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण किया जाएगा। इसके बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जाएगा। ग्रहण काल की पवित्रता और शास्त्रीय मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। ग्रहण का समय शाम 5:46 बजे से 6:48 बजे तक निर्धारित है। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहेंगे और किसी भी प्रकार का पूजा-अर्चना या दर्शन कार्य नहीं होगा।

दोपहर 12:30 बजे बंद होगा एंट्री पॉइंट
श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए मंदिर परिसर के मुख्य एंट्री पॉइंट को दोपहर 12:30 बजे बंद कर दिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि निर्धारित समय के बाद किसी भी श्रद्धालु को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। जो श्रद्धालु जलार्पण करना चाहते हैं, उन्हें समय से पहले मंदिर पहुंचने की सलाह दी गई है। मंदिर प्रबंधन समिति ने सुरक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ कर दी है। भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे परिसर की निगरानी की जाएगी।

ग्रहण के बाद होगी विशेष शुद्धिकरण प्रक्रिया
ग्रहण समाप्त होने के बाद परंपरा के अनुसार मंदिर का पट पुनः खोला जाएगा। सबसे पहले मंदिर परिसर और गर्भगृह को शुद्ध जल से धोया जाएगा। इसके बाद बाबा बैद्यनाथ का विशेष श्रृंगार पूजन किया जाएगा। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, ग्रहण के बाद की जाने वाली यह शुद्धिकरण प्रक्रिया सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि ग्रहण काल के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए मंदिर को पुनः पवित्र करने के लिए जल से धोकर विशेष पूजा की जाती है।

परंपरा और आस्था का संगम
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु जलार्पण के लिए पहुंचते हैं। ग्रहण जैसे खगोलीय घटनाक्रम के दौरान यहां की धार्मिक गतिविधियां और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि ग्रहण के दौरान भगवान शिव का स्मरण और मंत्र जाप विशेष फलदायी होता है। हालांकि मंदिर के पट बंद रहने के कारण भक्त अपने घरों में ही पूजा-अर्चना करेंगे।

प्रशासन की अपील
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय का पालन करें और अनावश्यक भीड़ न लगाएं। साथ ही, अफवाहों पर ध्यान न देते हुए आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
श्रद्धालुओं को यह भी सलाह दी गई है कि वे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को भीड़ से दूर रखें। ग्रहण के दौरान घरों में ही पूजा-पाठ और मंत्र जाप करना अधिक उपयुक्त माना गया है।
धार्मिक नगरी में उत्सुकता
देवघर में ग्रहण को लेकर विशेष उत्सुकता देखी जा रही है। मंदिर परिसर के आसपास की दुकानों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। हालांकि, ग्रहण के कारण शाम के समय मंदिर क्षेत्र में सामान्य दिनों की तुलना में कम गतिविधि रहने की संभावना है।
गौरतलब है कि ग्रहण समाप्ति के बाद जैसे ही मंदिर का पट खुलेगा, भक्तों की भीड़ एक बार फिर उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने इसके लिए भी पूर्व तैयारी कर रखी है।

