देवघर जिले के चितरा थाना क्षेत्र अंतर्गत पोद्दार बंध गांव में मारपीट की एक गंभीर घटना सामने आई है। इस घटना में पति-पत्नी दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों द्वारा दोनों को इलाज के लिए देवघर सदर अस्पताल लाया गया, जहां ऑन ड्यूटी चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है, वहीं पुलिस को मामले की सूचना दे दी गई है।

घटना के संबंध में घायल महिला गुड़िया देवी की मां बेबी देवी ने बताया कि गुड़िया देवी और उसके पति आशीष यादव अपने घर के खाली हाल में धान झाड़ने का काम कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर चचेरे भाई से विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि चचेरे भाई ने अचानक लोहे की रॉड से हमला कर दिया। इस हमले में गुड़िया देवी के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिससे उनका सिर फट गया और वह लहूलुहान होकर गिर पड़ी।
बताया जा रहा है कि जब गुड़िया देवी के पति आशीष यादव ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो हमलावर ने उसके साथ भी मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान आशीष यादव को भी गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद दोनों घायल जमीन पर गिर पड़े। शोरगुल सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजन आनन-फानन में दोनों घायलों को इलाज के लिए देवघर सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन दोनों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार गुड़िया देवी के सिर में गहरी चोट आई है, जबकि आशीष यादव को भी शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें लगी हैं।
घटना की सूचना चितरा थाना पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और परिजनों से घटना की जानकारी ली। चितरा थाना पुलिस का कहना है कि आवेदन मिलने के बाद पूरे मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस हमलावर की पहचान और घटना के कारणों की जांच में जुटी हुई है।
इस घटना के बाद पोद्दार बंध गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि आपसी विवाद को लेकर इस तरह की हिंसक घटना निंदनीय है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बताते चलें कि ग्रामीण इलाकों में आपसी विवाद के दौरान मारपीट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। समय रहते प्रशासनिक कार्रवाई और आपसी समझ से ऐसे मामलों को रोका जा सकता है। फिलहाल सभी की नजरें पुलिस जांच और घायलों के स्वास्थ्य पर टिकी हुई हैं।

