By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर जिले के जसीडीह स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विश्वनाथ चौधरी ने की। कार्यशाला के दौरान उन्होंने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य देवघर प्रखंड क्षेत्र को फाइलेरिया यानी हाथी पांव जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करना है।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विश्वनाथ चौधरी ने बताया कि एमडीए अभियान के तहत 10 फरवरी को विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बूथ बनाकर लोगों को दवा खिलाई जाएगी। वहीं 11 फरवरी से 25 फरवरी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर लोगों को दवा खिलाएगी। इस अभियान में डीईसी (डाईएथिलकार्बामाजिन) और एल्बेंडाजोल दवाओं का वितरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सहिया और सेविका कार्यकर्ता अपने सामने लोगों को दवा खिलाएंगी ताकि दवा सेवन सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि देवघर प्रखंड में कुल 2,01,722 लक्षित आबादी को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारी की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसीडीह के सभागार में निगरानी कार्यकर्ता आसिफ हुसैन द्वारा 27 जनवरी 2025 से 6 फरवरी 2025 तक कुल 11 बैचों में 650 से अधिक सहिया और सेविका को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान दवा वितरण, लोगों को जागरूक करने और संभावित प्रतिकूल प्रभावों से निपटने की जानकारी दी गई।

अभियान की सफलता के लिए देवघर प्रखंड में कुल 321 बूथ बनाए गए हैं। इन बूथों पर कुल 665 दवा प्रशासक कार्य करेंगे, जिनकी निगरानी के लिए 65 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा प्रखंड स्तर पर चिकित्सा पदाधिकारियों को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही 8 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रखंड स्तरीय पर्यवेक्षक बनाया गया है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अभियान की निगरानी करेंगे।

डॉ. विश्वनाथ चौधरी ने बताया कि इस अभियान में शून्य से एक वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अत्यंत गंभीर बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को दवा खाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि लोग लगातार पांच वर्षों तक इस दवा का सेवन करते हैं तो फाइलेरिया रोग को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और दवा सेवन को सुनिश्चित करें।

उन्होंने बताया कि यह दवा खाली पेट नहीं खानी चाहिए। एल्बेंडाजोल की गोली को चबाकर खाना आवश्यक है। दवा सेवन के बाद यदि किसी व्यक्ति को सिर दर्द, उल्टी या हल्का बुखार जैसी समस्या होती है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर में मौजूद माइक्रोफाइलेरिया के कीड़े नष्ट हो रहे हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि व्यक्ति में पहले संक्रमण मौजूद था और दवा के माध्यम से उसे खत्म किया जा रहा है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर और असाध्य बीमारी है। यदि किसी व्यक्ति को एक बार हाथी पांव हो जाता है तो उसका स्थायी इलाज संभव नहीं होता है। इसलिए इस बीमारी से बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।

अभियान के दौरान यदि किसी व्यक्ति को दवा सेवन के बाद प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देता है तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। प्रखंड मुख्यालय में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा प्रखंड स्तरीय कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जो अभियान के दौरान सभी गतिविधियों पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता उपलब्ध कराएगा।

कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अभियान की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाएं ताकि अधिक से अधिक लोग दवा का सेवन कर सकें। उन्होंने कहा कि जन जागरूकता के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है।

संवाददाता सम्मेलन में चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. संतोष कुमार, डॉ. पूजा रॉय, निगरानी कार्यकर्ता आसिफ हुसैन तथा प्रदीप कुमार सहित कई स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से लोगों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग की टीम का सहयोग करें और फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि समाज के सभी वर्ग इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं तो आने वाली पीढ़ियों को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। इसलिए सभी लोगों को दवा सेवन कर इस अभियान को सफल बनाना चाहिए।
