By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में वर्षभर देश के कोने – कोने से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बाबा भोलेनाथ के प्रति आस्था ऐसी है कि भक्त अपनी भक्ति को अनोखे तरीकों से प्रकट करते हैं। कोई कांवड़ लेकर आता है तो कोई विशेष वेशभूषा में बाबा के दरबार में हाजिरी लगाता है। इसी कड़ी में सोमवार को पंजाब के जालंधर से पहुंचे तीन साधकों ने अपनी विशिष्ट वेशभूषा, भजन-कीर्तन और जयकारों से बाबा मंदिर प्रांगण को भक्तिमय बना दिया।

जालंधर से पहुंचे कल जंगम अपने साथियों श्याम संगम महाराज एवं समर संगम के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना करने पहुंचे। मंदिर में इन साधकों की पूजा विधिवत रूप से मंदिर के पुजारी जयदेव मिश्रा द्वारा कराई गई। पूजा के उपरांत तीनों साधकों ने बाबा के दरबार में भजन – कीर्तन की शुरुआत की। ढोलक, मंजीरा और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा मंदिर प्रांगण गूंज उठा।
भजन – कीर्तन के दौरान साधकों की आकर्षक वेशभूषा और उनकी भक्ति में डूबी प्रस्तुति को देखने के लिए मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु स्वतः ही उनकी ओर आकर्षित हो गए। कुछ देर के लिए मंदिर प्रांगण मानो भक्ति के रंग में रंग गया। श्रद्धालु भी साधकों के साथ जयकारे लगाते नजर आए और वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक हो उठा।
इस अवसर पर जालंधर स्थित माता दरबार के पुजारी कल जंगम ने बताया कि वे लोग सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से पदयात्रा एवं तीर्थ भ्रमण पर निकले हैं। उन्होंने कहा कि “हम तीनों साथी सनातन धर्म की अलख जगाने के लिए घर-घर, गली-मोहल्लों और तीर्थ स्थलों पर जाकर लोगों को धर्म से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि सनातन संस्कृति की जड़ों को और मजबूत किया जाए।”
कल जंगम ने आगे बताया कि उनकी यह धार्मिक यात्रा पंजाब के जालंधर से प्रारंभ हुई है। इस यात्रा के दौरान वे जहां-जहां प्रमुख तीर्थ स्थल पड़ते हैं, वहां रुककर पूजा-अर्चना करते हैं और स्थानीय लोगों के बीच सनातन धर्म का संदेश देते हैं। उन्होंने बताया कि इस क्रम में सबसे पहले वे गंगासागर पहुंचे, जहां मां गंगा और सागर के संगम पर पूजा की। इसके बाद बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया।

उन्होंने कहा कि देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां आकर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। बाबा के दर्शन मात्र से ही मन को शांति और आत्मबल मिलता है। यही कारण है कि उनकी यात्रा में बाबा बैद्यनाथ धाम का विशेष महत्व है।
कल जंगम ने बताया कि देवघर के बाद उनकी यात्रा वासुकीनाथ धाम की ओर प्रस्थान करेगी, जहां भगवान शिव के दर्शन कर वे आगे की यात्रा शुरू करेंगे। इसके बाद काशी विश्वनाथ, प्रयागराज, अयोध्या सहित अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों में दर्शन-पूजन करने की योजना है। अंत में यह यात्रा पुनः जालंधर पहुंचकर संपन्न होगी।
उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी संस्कृति और धर्म से जोड़ना बेहद जरूरी है। सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पद्धति है, जो सत्य, अहिंसा, सेवा और करुणा का मार्ग दिखाती है। इसी संदेश को लेकर वे लोग यात्रा कर रहे हैं।
बाबा मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी साधकों की इस पहल की सराहना की। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह की यात्राएं समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और लोगों को धर्म के प्रति जागरूक बनाती हैं। विशेषकर जब भजन-कीर्तन के माध्यम से संदेश दिया जाता है तो उसका प्रभाव और भी गहरा होता है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम में इस तरह के अनोखे भक्तों का आना नई बात नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संत और भक्त अपने-अपने तरीके से बाबा की भक्ति करते हैं, जिससे मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा और भी बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर, जालंधर से पहुंचे साधकों की यह यात्रा न केवल एक धार्मिक भ्रमण है, बल्कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम भी है। बाबा बैद्यनाथ धाम में उनकी उपस्थिति और भक्ति ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भोलेनाथ के दरबार में हर भक्त का स्वागत समान भाव से होता है, चाहे वह किसी भी वेश में क्यों न आया हो।

