By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। भोलेनाथ की पावन नगरी देवघर को सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि स्वाद और जायकों का शहर भी कहा जाता है। खासकर जब मकर संक्रांति का पर्व नजदीक आता है, तो देवघर की पहचान और भी खास हो जाती है। इस दौरान तिलकुट की मिठास और उसकी सुगंध देवघर की फिजाओं में घुलने लगती है। स्थिति यह होती है कि मकर संक्रांति से लगभग एक महीने पहले ही तिलकुट का स्वाद लोगों की दिनचर्या में शामिल हो जाता है। देवघर के गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजारों तक इन दिनों तिलकुट की दुकानों की कतारें देखने को मिल रही हैं। अनुमान के मुताबिक शहर में 100 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें सिर्फ तिलकुट की बिक्री के लिए सज चुकी हैं। इन दुकानों पर सुबह से देर रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है, जो देवघर के प्रसिद्ध तिलकुट को अपने घर ले जाने के लिए उत्साहित नजर आते हैं।

₹250 से ₹350 तक बिक रहा है तिलकुट
इस वर्ष तिलकुट की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी जरूर देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद मांग में कोई कमी नहीं आई है। बाजार में तिलकुट ₹250 से लेकर ₹350 प्रति किलो तक बिक रहा है। कीमत तिलकुट की गुणवत्ता, सामग्री और स्वाद के अनुसार तय की जा रही है। विशेष रूप से चीनी, गुड़ और खोवा से बने तिलकुट ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। दुकानदारों के अनुसार, खोवा तिलकुट की मांग सबसे अधिक है, क्योंकि इसका स्वाद और सुगंध लंबे समय तक याद रहती है।
पराठा गली से मीना बाजार तक फैली तिलकुट की खुशबू
देवघर की प्रसिद्ध पराठा गली, आजाद चौक और मीना बाजार इन दिनों तिलकुट की खुशबू से महक रहे हैं। इन इलाकों में तिलकुट की दुकानों पर पारंपरिक तरीके से तिल भूनते हुए और हथौड़े से तिलकुट कूटते हुए कारीगर नजर आते हैं। यही पारंपरिक तरीका देवघर के तिलकुट को खास बनाता है। कई दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक न सिर्फ देवघर, बल्कि झारखंड के विभिन्न जिलों, बिहार और पश्चिम बंगाल तक से यहां तिलकुट खरीदने पहुंचते हैं। श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन के बाद तिलकुट को प्रसाद और सौगात के रूप में ले जाना नहीं भूलते।
गया के बाद देवघर का तिलकुट सबसे प्रसिद्ध
हालांकि बिहार के गया का तिलकुट देशभर में मशहूर है, लेकिन गया के बाद अगर कहीं का तिलकुट सबसे अधिक प्रसिद्ध है तो वह है बाबा नगरी देवघर। यहां की खास बात यह है कि तिलकुट का सेवन सिर्फ मकर संक्रांति के दिन ही नहीं, बल्कि पूरे ठंड के मौसम में किया जाता है। देवघर में लोग एक महीने पहले से ही तिलकुट खाना शुरू कर देते हैं और इसे सर्दी में शरीर को ऊर्जा देने वाला और स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं। तिल और गुड़ से बना तिलकुट शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है।

मकर संक्रांति को लेकर अन्य सामग्री की भी बढ़ी मांग
मकर संक्रांति के मद्देनजर देवघर के बाजारों में सिर्फ तिलकुट ही नहीं, बल्कि चूड़ा, मुड़ी, तिल, गुड़ से बने लड्डू और अन्य पारंपरिक सामग्रियों की भी जबरदस्त बिक्री हो रही है।
ग्राहक बड़ी मात्रा में इन चीजों की खरीदारी कर रहे हैं ताकि पर्व के दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और खान-पान किया जा सके। इसके अलावा, गुड़ की बिक्री में भी खासा उछाल देखा जा रहा है। दुकानदारों के अनुसार, मकर संक्रांति के दौरान गुड़ की खपत सामान्य दिनों की तुलना में दोगुनी हो जाती है। पर्व को लेकर बाजारों में रौनक और उत्साह दोनों चरम पर हैं।
दुकानदारों में उत्साह, कारोबार में आई तेजी
तिलकुट व्यवसाय से जुड़े दुकानदारों का कहना है कि इस साल मौसम अनुकूल रहने के कारण बिक्री अच्छी हो रही है। ठंड का असर रहने से तिलकुट की मांग बनी हुई है।
कई दुकानदारों ने बताया कि मकर संक्रांति नजदीक आते-आते बिक्री और तेज हो जाएगी और अंतिम दिनों में रिकॉर्ड तोड़ कारोबार होने की उम्मीद है।
देवघर की पहचान बन चुका है तिलकुट
आज तिलकुट सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि देवघर की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान बन चुका है। मकर संक्रांति के अवसर पर तिलकुट देवघर की मिठास और परंपरा को देश-दुनिया तक पहुंचाता है। यही वजह है कि हर साल इस पर्व पर देवघर के तिलकुट की चर्चा हर ओर होती है।

