By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। नगर निगम चुनाव 2026 के परिणाम घोषित होने के बाद जहां विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों में उत्साह और जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं चुनावी मैदान में उतरे कई प्रत्याशियों के बीच निराशा का माहौल भी है। हालांकि कुछ उम्मीदवार ऐसे भी रहे, जिन्होंने जीत भले हासिल नहीं की, लेकिन चुनाव के दौरान अपनी अलग पहचान और विचारधारा के कारण चर्चा में बने रहे। ऐसे ही प्रत्याशियों में मेयर पद के उम्मीदवार कुंदन शर्मा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।

चुनाव परिणाम में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद कुंदन शर्मा को हजार से अधिक मत प्राप्त हुए, जिसे राजनीतिक विश्लेषक सम्मानजनक समर्थन मान रहे हैं। खास बात यह रही कि उन्हें शहर के कॉलेजों और युवा वर्ग का अच्छा समर्थन मिलता दिखाई दिया। चुनावी समीकरण भले उनके पक्ष में पूरी तरह नहीं रहे, लेकिन युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता चर्चा का विषय बनी रही।
युवाओं के मुद्दों को बनाया चुनाव का केंद्र
नगर निगम चुनाव में अधिकांश प्रत्याशी जहां पारंपरिक मुद्दों — सड़क, नाली, जलापूर्ति और सफाई व्यवस्था — पर फोकस करते नजर आए, वहीं कुंदन शर्मा ने अपने चुनाव अभियान में युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी। उन्होंने लगातार यह सवाल उठाया कि शहर के विकास की योजनाओं में युवाओं की भूमिका और जरूरतों को क्यों नजरअंदाज किया जाता है।

कुंदन शर्मा ने अपने प्रचार अभियान के दौरान सार्वजनिक पुस्तकालय, खेल मैदान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन केंद्र तथा सरकारी शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि किसी भी शहर का भविष्य वहां के युवाओं पर निर्भर करता है और यदि युवाओं को अवसर नहीं मिलेगा तो शहर का समग्र विकास संभव नहीं है।
“चुनाव जीत-हार से ज्यादा उद्देश्य महत्वपूर्ण था” — कुंदन शर्मा
चुनाव परिणाम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कुंदन शर्मा ने कहा कि उनके लिए यह चुनाव केवल जीत या हार का माध्यम नहीं था, बल्कि युवाओं की आवाज को राजनीतिक मंच तक पहुंचाने का प्रयास था।
उन्होंने कहा,
“हमारे लिए चुनाव का उद्देश्य सिर्फ जीत हासिल करना नहीं था। हम यह दिखाना चाहते थे कि कौन से मेयर प्रत्याशी युवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई उम्मीदवारों के मेनिफेस्टो में छात्रों, पुस्तकालयों, खेल सुविधाओं या शिक्षा से जुड़े ठोस योजनाओं का अभाव दिखा।”
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में युवा उनके साथ जुड़े और उन्होंने हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया। यह समर्थन उनके लिए किसी जीत से कम नहीं है।

कॉलेज युवाओं का मिला सामूहिक समर्थन
चुनाव प्रचार के दौरान शहर के विभिन्न कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के छात्रों ने कुंदन शर्मा के समर्थन में अभियान चलाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी युवाओं द्वारा उनके पक्ष में सक्रिय प्रचार देखा गया। कई छात्र समूहों ने उन्हें “युवा सोच का उम्मीदवार” बताते हुए समर्थन किया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भले ही वोट प्रतिशत ज्यादा नहीं रहा, लेकिन युवाओं का एकमुश्त समर्थन भविष्य की राजनीति के संकेत दे रहा है। यह भी माना जा रहा है कि यदि युवा मुद्दों पर लगातार काम किया गया तो आने वाले चुनावों में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

शिक्षा व्यवस्था सुधार पर रहेगा फोकस
कुंदन शर्मा ने स्पष्ट किया कि चुनाव खत्म होने के बाद भी उनका सामाजिक और जनसरोकार से जुड़ा अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था सुधारना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने कहा,
“मेरे साथ देवघर के ऐसे युवा साथी जुड़े, जिन्होंने हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया। मैं सभी का धन्यवाद करता हूं और यह भरोसा दिलाता हूं कि युवाओं की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मैं हमेशा छात्रों के साथ खड़ा रहूंगा।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में युवाओं के लिए जागरूकता अभियान, संवाद कार्यक्रम और शिक्षा सुधार से जुड़े जन आंदोलन चलाए जा सकते हैं।
राजनीति में युवाओं की बढ़ती भागीदारी
देवघर नगर निगम चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि स्थानीय राजनीति में युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां स्थानीय चुनावों में पारंपरिक नेतृत्व हावी रहता था, वहीं अब नई पीढ़ी भी सक्रिय रूप से चुनावी प्रक्रिया में भाग ले रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में विकास के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, खेल और डिजिटल अवसर जैसे मुद्दे भी स्थानीय चुनावों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे। कुंदन शर्मा जैसे उम्मीदवारों की सक्रियता इस बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।

भविष्य की राजनीति के संकेत
हालांकि चुनावी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुंदन शर्मा ने पहली बार चुनाव लड़कर युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल की है। यह अनुभव भविष्य की राजनीति के लिए उनके लिए मजबूत आधार साबित हो सकता है।
स्थानीय स्तर पर कई युवाओं ने भी यह उम्मीद जताई है कि शहर में शिक्षा और युवा विकास से जुड़े मुद्दों को अब गंभीरता से उठाया जाएगा।
देवघर नगर निगम चुनाव 2026 का परिणाम भले ही कुछ उम्मीदवारों के लिए निराशाजनक रहा हो, लेकिन इस चुनाव ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में मुद्दों की दिशा बदल रही है। युवाओं की भागीदारी और उनके मुद्दों को केंद्र में रखने वाले उम्मीदवार भले तत्काल जीत न हासिल करें, लेकिन वे भविष्य की राजनीति की नई दिशा तय कर रहे हैं।
कुंदन शर्मा का चुनावी सफर इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है, जहां हार के बावजूद विचार और उद्देश्य चर्चा का विषय बन गए हैं।

