
By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। देवघर नगर निगम के कर्मचारियों ने दो माह से लंबित वेतन भुगतान को लेकर मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने भूख मार्च निकालते हुए नगर निगम प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। यह जुलूस नगर निगम डिपो से शुरू होकर पानी टंकी, बजरंगी चौक, टावर चौक, टाउन थाना होते हुए उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचा। हाथों में तख्तियां और नारों के साथ निकले कर्मचारियों ने जल्द वेतन भुगतान की मांग की। नगर निगम कर्मियों का कहना है कि पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों को घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भारी परेशानी हो रही है। कई कर्मचारियों ने बताया कि वे कर्ज लेकर किसी तरह घर चला रहे हैं।
नगर आयुक्त के आश्वासन पर भी नहीं हुआ भुगतान
कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त द्वारा बार-बार वेतन भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आश्वासन के बाद भी वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी के विरोध में मंगलवार को भूख मार्च निकालने का निर्णय लिया गया। कर्मचारियों ने कहा कि वे नगर निगम के सफाई, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जरूरी सेवाओं को लगातार सुचारु रूप से चला रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। यह न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय है, बल्कि उनके आत्मसम्मान पर भी चोट है।
उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
भूख मार्च के दौरान कर्मचारियों का जुलूस उपायुक्त कार्यालय पहुंचा, जहां प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। कर्मचारियों ने उपायुक्त के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि यदि जल्द से जल्द बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारी संघ ने बताया कि यह आंदोलन केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम कर्मियों के सम्मान और अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो आगे कार्य बहिष्कार जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारी
नगर निगम कर्मियों ने बताया कि वेतन न मिलने से उनके घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों के बच्चों की स्कूल फीस बकाया है, तो किसी के घर में दवाइयों के पैसे नहीं हैं। ऐसे में लगातार काम करने के बावजूद वेतन न मिलना कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम की जिम्मेदारी है कि वह अपने कर्मियों को समय पर वेतन दे, ताकि वे बिना तनाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। यदि कर्मचारियों की स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो इसका असर नगर की सफाई व्यवस्था और अन्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।
उपायुक्त ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
उपायुक्त ने कर्मचारियों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि वे इस मामले में संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर शीघ्र समाधान का प्रयास करेंगे। उपायुक्त ने कहा कि कर्मचारियों की समस्या जायज है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। हालांकि कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि आश्वासन के बावजूद वेतन भुगतान में देरी होती है, तो वे फिर से आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों ने प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है, न कि सिर्फ आश्वासन की।
शहर की व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
नगर निगम कर्मियों के आंदोलन से शहर की साफ-सफाई और अन्य आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार का फैसला लिया, तो इसका सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन के सामने जल्द समाधान निकालने की चुनौती है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना चाहिए, क्योंकि नगर की स्वच्छता और व्यवस्था उन्हीं पर निर्भर है। कर्मचारियों की उपेक्षा करना शहर की व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें बकाया वेतन नहीं मिल जाता। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन और नगर निगम पर टिकी हुई हैं कि वे इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकालते हैं। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो देवघर नगर निगम में आंदोलन और तेज होने की पूरी संभावना है।
