देवघर। देवघर नगर निगम के सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी रही। वेतन, पेंशन और ईपीएफ/पीएफ भुगतान में लगातार हो रही देरी के खिलाफ नगर निगम के सभी सफाई कर्मियों ने एकजुट होकर नगर निगम कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को नगर आयुक्त तक पहुंचाया। कर्मियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक बकाया भुगतान समय पर नहीं किया जाएगा, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
सफाई कर्मियों की इस हड़ताल के चलते देवघर शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, नालियों की सफाई नहीं हो रही है और बदबू से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धार्मिक नगरी देवघर में साफ-सफाई की बदहाली से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों दोनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

महीनों से नहीं मिला वेतन, पेंशन भी अटकी
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे फेडरेशन अध्यक्ष संजय मंडल ने बताया कि नगर निगम के सफाई कर्मियों को महीनों से वेतन नहीं दिया गया है। कई कर्मचारियों की पेंशन भी लंबित है, वहीं ईपीएफ और पीएफ की राशि भी समय पर जमा नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार आश्वासन देकर कर्मचारियों को टाल दिया जाता है, जिससे उनका भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।
संजय मंडल ने कहा,
“हम लोग महीनों से बिना वेतन काम कर रहे हैं। घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हमें कर्ज लेना पड़ रहा है। नगर निगम सिर्फ आश्वासन देता है, लेकिन भुगतान नहीं करता। अब मजबूर होकर हमें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है।”

दो-तीन महीने काम के बाद एक महीने का वेतन
धरना दे रहे सफाई कर्मियों ने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त द्वारा वेतन का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है। कई बार दो-तीन महीने काम कराने के बाद सिर्फ एक महीने का वेतन दिया जाता है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
एक सफाई कर्मी ने बताया,
“हम रोज सुबह से शाम तक शहर को साफ रखते हैं, लेकिन बदले में हमें समय पर वेतन तक नहीं मिलता। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। किराया, बच्चों की फीस और दवाइयों का खर्च कैसे उठाएं?”
शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित
हड़ताल के चलते देवघर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। कई मोहल्लों में कचरा उठाव बंद है, नालियों की सफाई नहीं हो रही और सड़कों पर गंदगी पसरी हुई है। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान निकालना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई कर्मियों की मांगें जायज हैं और उन्हें उनका हक समय पर मिलना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, धार्मिक नगरी होने के कारण देवघर में स्वच्छता का विशेष महत्व है, लेकिन हड़ताल के कारण शहर की छवि भी धूमिल हो रही है।

नगर निगम प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब नियमित रूप से टैक्स वसूली हो रही है और सरकार से फंड मिल रहा है, तो फिर कर्मचारियों का वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा।
सफाई कर्मियों ने मांग की है कि
सभी बकाया वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए
पेंशन का निपटारा जल्द किया जाए
ईपीएफ/पीएफ की राशि समय पर जमा की जाए
भविष्य में हर महीने समय पर वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा और तेज
फेडरेशन अध्यक्ष संजय मंडल ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा,
“हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अगर प्रशासन ने अब भी अनदेखी की तो हमें उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।”
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी
अब तक नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारियों का कहना है कि नगर आयुक्त से कई बार मुलाकात की कोशिश की गई, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
हड़ताल के चलते जहां एक ओर शहर की स्वच्छता व्यवस्था चौपट हो गई है, वहीं दूसरी ओर हजारों सफाई कर्मियों के परिवारों की आजीविका भी संकट में पड़ गई है।
निष्कर्ष
देवघर नगर निगम के सफाई कर्मियों की यह हड़ताल सिर्फ वेतन का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है। अगर प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो इसका असर आम जनता से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक पर पड़ेगा। अब देखना यह है कि नगर निगम और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक कर्मचारियों को उनका हक मिल पाता है।

