By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। झारखंड के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ए एस महाविद्यालय, देवघर में वरिष्ठ शिक्षाविद एवं राजनीति विज्ञान के प्रख्यात प्राध्यापक डॉ पशुपति राय के आकस्मिक निधन पर मंगलवार को एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस शोकसभा में महाविद्यालय के शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों और छात्र-छात्राओं ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ टी.पी. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस शोकसभा में डॉ पशुपति राय के शैक्षणिक जीवन, उनके व्यक्तित्व और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को विस्तार से याद किया गया। उपस्थित शिक्षकों ने कहा कि डॉ राय न केवल एक कुशल शिक्षक थे, बल्कि वे विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी रहे।

बताया गया कि डॉ पशुपति राय ने वर्ष 1980 में ए एस महाविद्यालय, देवघर में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं प्रारंभ की थीं। अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज में बेहतर स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी शैक्षणिक योग्यता और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए वर्ष 2009 से 2016 तक उन्हें विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के स्नातकोत्तर विभाग का विभागाध्यक्ष बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। अपने कार्यकाल में उन्होंने परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई उल्लेखनीय पहल कीं।
शोकसभा को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ टी.पी. सिंह ने कहा कि डॉ पशुपति राय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे अपने दायित्वों के प्रति हमेशा गंभीर और समर्पित रहते थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों का भरपूर सहयोग किया और शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि डॉ राय का व्यक्तित्व सरल, विनम्र और सहयोगी था। वे हमेशा विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करते थे। उनका निधन निश्चित रूप से शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।
शोकसभा के दौरान डॉ अशोक कुमार और डॉ जानकी नंदन सिंह ने भी डॉ पशुपति राय के साथ बिताए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि डॉ राय एक आदर्श शिक्षक और कुशल प्रशासक थे। वे हमेशा अपने सहकर्मियों को प्रेरित करते थे और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहते थे।
उन्होंने यह भी कहा कि डॉ राय का जीवन अनुशासन, समर्पण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण था। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले कई छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।

सभा में यह भी बताया गया कि डॉ पशुपति राय ने नवंबर 2016 से जनवरी 2021 तक मधुपुर महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। इस दौरान उन्होंने संस्थान के शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
शोकसभा के दौरान विश्वविद्यालय के पूर्व प्रति कुलपति डॉ हनुमान प्रसाद शर्मा के निधन पर भी गहरा शोक व्यक्त किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने उनके योगदान को याद करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी एवं छात्र-छात्राओं ने दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

इस अवसर पर महाविद्यालय के कई शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे। इनमें डॉ अशोक कुमार, डॉ पुष्पलता, डॉ किरण पाठक, डॉ अनिल कुमार, डॉ भारती प्रसाद, डॉ पायल प्रदर्शनी, डॉ जानकी नंदन सिंह, डॉ राणा प्रताप सिंह, डॉ मनोज कुमार, डॉ विपिन कुमार, डॉ राजेश बिसेन, डॉ डी.पी. मंडल, डॉ नंदन द्विवेदी, डॉ शंभूनाथ मिश्र, डॉ अनुराधा, डॉ अभय कुमार, डॉ पूनम ठाकुर, डॉ उमा, डॉ सोनल, डॉ संगीता, डॉ मौसमी, डॉ पी. मित्रा, डॉ ए.के. मांझी, डॉ ए.डी. मिश्रा, डॉ अशोक किस्कु, डॉ श्रीधर सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

इसके अलावा शिक्षकेत्तर कर्मियों में श्री विश्वास, श्री अमित, श्री सुनील, श्रीमती रीता देवी, श्रीमती गायत्री देवी, श्री दीपक, श्री निशिकांत और श्री सिकंदर सहित कई कर्मचारी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
शोकसभा के माध्यम से सभी ने डॉ पशुपति राय के व्यक्तित्व और उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही यह संकल्प भी लिया गया कि उनके आदर्शों और मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया जाएगा।

