By: Vikash Mala Mandal
देवघर। निजी विद्यालयों द्वारा ली जाने वाली फीस और उनके संचालन को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। इसी क्रम में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के सभी निजी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत शुल्क समिति के गठन और शुल्क विनियमन से संबंधित दिशा-निर्देशों की समीक्षा करना था। उपायुक्त ने इस दौरान स्पष्ट किया कि जिले में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

शुल्क समिति गठन पर सख्त निर्देश
बैठक के दौरान उपायुक्त ने सभी निजी विद्यालयों से ‘शुल्क समिति’ के गठन की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। जिन विद्यालयों ने अब तक इस समिति का गठन नहीं किया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से समिति गठित करने का सख्त निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि शुल्क समिति का गठन अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना शुल्क समिति के निर्णय के कोई भी विद्यालय मनमाने तरीके से फीस निर्धारित नहीं कर सकता। यह कदम अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि पर रोक
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक यह रहा कि यदि कोई निजी विद्यालय पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि करना चाहता है, तो उसे जिला समिति से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।उपायुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि बिना अनुमति के की गई किसी भी प्रकार की फीस वृद्धि अवैध मानी जाएगी और संबंधित विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस निर्देश के बाद अब निजी स्कूलों के लिए फीस बढ़ाना आसान नहीं होगा और उन्हें नियमानुसार प्रक्रिया का पालन करना होगा।

केवल शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए संसाधनों का उपयोग
उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालय परिसर और वहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों के लिए ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें मिलती हैं कि स्कूल परिसर का उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता है, जो पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने सभी विद्यालय प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अधिनियम 2017 के प्रावधानों का पालन अनिवार्य
बैठक में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि यह अधिनियम विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है, इसलिए इसका पूरी गंभीरता से पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया कि सभी निजी विद्यालयों तक इस अधिनियम की जानकारी स्पष्ट रूप से पहुंचाई जाए और उसके पालन की निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।

RTE के दायरे से बाहर स्कूल भी आएंगे नियमों में
बैठक के दौरान एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के दायरे से बाहर आने वाले निजी विद्यालयों को भी संबंधित दिशा-निर्देश भेजे जाएंगे। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि कोई भी विद्यालय नियमों से ऊपर नहीं है और सभी को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने और सभी विद्यालयों को निर्देश भेजने का निर्देश दिया गया।

अभिभावकों और बच्चों के हित सर्वोपरि
बैठक के अंत में उपायुक्त ने सभी निजी विद्यालयों को निर्देशित किया कि वे अपने कार्यों में बच्चों और अभिभावकों के हितों को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक संवेदनशील क्षेत्र है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी भी अभिभावक को विद्यालय से संबंधित कोई शिकायत होती है, तो प्रशासन उसकी गंभीरता से जांच करेगा और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी, निजी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रतिनिधि एवं संबंधित विभाग के अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
