By: Vikash Kumar ( Vicky )
देवघर। झारखंड के देवघर जिले का रिखिया थाना क्षेत्र इन दिनों बिहार में अवैध शराब तस्करी का बड़ा ट्रांजिट पॉइंट बनता जा रहा है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद रिखिया थाना क्षेत्र से सटे सीमावर्ती इलाकों के रास्ते शराब की तस्करी लगातार जारी है। सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तस्कर झारखंड-बिहार सीमा का खुलकर फायदा उठा रहे हैं और खुलेआम शराब की बड़ी खेप बिहार पहुंचा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि रिखिया थाना क्षेत्र से लगे ग्रामीण, पहाड़ी और जंगली रास्तों का इस्तेमाल कर तस्कर रात के अंधेरे में शराब की खेप बिहार भेजते हैं। इन रास्तों पर न तो नियमित पुलिस गश्ती होती है और न ही स्थायी चेक पोस्ट की व्यवस्था है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर तस्कर बाइक, चारपहिया वाहन और कभी-कभी पैदल ही शराब की ढुलाई कर रहे हैं।
ग्रामीण रास्ते बने तस्करी का मुख्य जरिया
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुख्य सड़कों की बजाय तस्कर कच्चे और सुनसान रास्तों का चयन करते हैं, जो सीधे बिहार की सीमा से जुड़े हुए हैं। इन रास्तों पर मोबाइल नेटवर्क भी कई जगह कमजोर है, जिससे सूचना तंत्र भी प्रभावित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय संदिग्ध वाहनों की आवाजाही आम बात हो गई है।
डर और दबाव में ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे आए दिन संदिग्ध गतिविधियां देखते हैं, लेकिन डर और दबाव के कारण खुलकर शिकायत नहीं कर पाते। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि तस्कर संगठित हैं और विरोध करने वालों को धमकाने से भी नहीं चूकते। यही कारण है कि गांवों में एक खामोशी सी छाई हुई है।

दिनदहाड़े भी हो रही शराब ढुलाई
सूत्रों का कहना है कि तस्कर अब इतने बेखौफ हो चुके हैं कि दिन के उजाले में भी शराब की ढुलाई करने लगे हैं। पहले यह काम केवल रात में होता था, लेकिन अब पुलिस कार्रवाई की आशंका कम देखकर दिन में भी शराब बिहार भेजी जा रही है। इससे साफ है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
संगठित गिरोह की सक्रियता
जानकारों का कहना है कि इस अवैध धंधे में संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जिनके तार झारखंड और बिहार दोनों राज्यों से जुड़े हुए हैं। ये गिरोह शराब की सप्लाई, परिवहन और वितरण की पूरी चेन को नियंत्रित करते हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सीमा क्षेत्र होने के कारण कार्रवाई के दौरान जिम्मेदारी झारखंड और बिहार पुलिस के बीच उलझ जाती है, जिसका सीधा फायदा तस्करों को मिलता है।
सीमावर्ती इलाका, कार्रवाई में ढील
सीमावर्ती इलाका होने के कारण कई बार यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि कार्रवाई किस राज्य की पुलिस को करनी है। इस आपसी समन्वय की कमी के कारण तस्कर आसानी से बच निकलते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दोनों राज्यों की पुलिस संयुक्त अभियान चलाए, तो तस्करी पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
पुलिस का पक्ष
इस मामले में जब रिखिया थाना से जुड़े अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बताया कि शराब तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बीते दिनों में कई बार शराब की खेप जब्त की गई है और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और गश्ती को और सख्त किया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त बल की तैनाती, रात्रि गश्ती बढ़ाने और स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
फिलहाल रिखिया थाना क्षेत्र से बिहार की ओर जारी शराब तस्करी प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। एक ओर बिहार में शराबबंदी को सख्ती से लागू करने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर झारखंड की सीमा से शराब की लगातार सप्लाई इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस अवैध कारोबार पर कब तक प्रभावी रोक लगा पाता है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह इलाका शराब तस्करी का स्थायी कॉरिडोर बन सकता है।
