
देवघर, झारखंड। भारत मुक्ति मोर्चा और उसके सहयोगी संगठनों ने गुरुवार को देवघर में चरणबद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत “जेल भरो आंदोलन” आयोजित कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह आंदोलन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने, किसानों के अधिकारों की रक्षा, ओबीसी समेत सभी जातियों की जनगणना और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर किया गया। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।
आंदोलन की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि देश में पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को हटाकर पारंपरिक बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए। उनका आरोप है कि EVM पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं और यह लोकतंत्र के लिए खतरा बन चुका है। नेताओं ने कहा कि जब तक बैलेट पेपर से चुनाव नहीं होंगे, आम जनता का विश्वास चुनाव प्रणाली से उठता जाएगा।
साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने जातीय जनगणना की मांग करते हुए कहा कि ओबीसी, दलित और सभी जातियों की वास्तविक जनसंख्या का पता लगाना जरूरी है। उनका तर्क है कि जातीय जनगणना से सरकारों को नीतियां बनाने में आसानी होगी और सभी वर्गों को उनके अधिकारों के अनुरूप हिस्सेदारी मिल सकेगी।
कॉलेजियम सिस्टम का विरोध
आंदोलन में कॉलेजियम सिस्टम को भी समाप्त करने की मांग उठी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्तमान कॉलेजियम व्यवस्था पारदर्शी नहीं है और न्यायपालिका में सामाजिक न्याय की भागीदारी कम है। उनका मानना है कि न्यायिक नियुक्तियों में सामाजिक विविधता और आरक्षण नीति का ध्यान रखना चाहिए।

किसानों और बहुजन महापुरुषों के सम्मान का मुद्दा
किसानों के अधिकारों को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा केवल कागज़ों तक सीमित है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने की मांग को भी उन्होंने दोहराया।
साथ ही, बहुजन महापुरुषों के अपमान पर उन्होंने गहरा आक्रोश व्यक्त किया और कहा कि उनके योगदान को इतिहास और पाठ्यक्रमों में उचित स्थान मिलना चाहिए।
रैली और गिरफ्तारी
इस आंदोलन की अगुवाई भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज चौधरी और वरिष्ठ नेता प्रकाश हाँस्दा ने की। उनके साथ कई सहयोगी संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रदर्शनकारी समाहरणालय से टावर चौक तक रैली निकालते हुए नारेबाजी करते रहे। रैली के दौरान “EVM हटाओ – लोकतंत्र बचाओ”, “जातीय जनगणना लागू करो” और “किसानों को उनका हक दो” जैसे नारे गूंजते रहे।
अंत में सभी कार्यकर्ता और नेता थाने पहुंचे और स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी। पुलिस ने सभी को शांतिपूर्वक हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया।

आंदोलन का स्वरूप और भविष्य की रणनीति
आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार को अपनी मांगों के प्रति सचेत करना है। भारत मुक्ति मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती तो आने वाले दिनों में पूरे झारखंड समेत देशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज चौधरी ने कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है। यदि हमारी मांगें अनसुनी की गईं तो हम चरणबद्ध तरीके से बड़ा जनांदोलन खड़ा करेंगे। EVM हटाना और जातीय जनगणना कराना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।”
जनता की भागीदारी और राजनीतिक संदेश
रैली में आम जनता की भागीदारी भी देखने को मिली। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया और कहा कि यह केवल किसी पार्टी या संगठन का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतांत्रिक भविष्य से जुड़ा सवाल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के आंदोलन से आने वाले चुनावों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि EVM हटाने और जातीय जनगणना जैसे मुद्दे बड़े पैमाने पर जनता के बीच बहस का विषय बन चुके हैं।
स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया
देवघर जिला प्रशासन ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। पुलिस बल को पहले से तैनात किया गया था ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासन ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि भविष्य में भी अपनी मांगें लोकतांत्रिक तरीके से रखें।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
भारत मुक्ति मोर्चा का यह जेल भरो आंदोलन केवल देवघर तक सीमित नहीं है। संगठन ने पहले ही घोषणा की थी कि यह चरणबद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन है। देश के विभिन्न राज्यों में भी इसी तरह के आंदोलन की तैयारी चल रही है।
देवघर का यह आंदोलन न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी संदेश देने वाला रहा। EVM हटाने, जातीय जनगणना और किसानों के अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर भारत मुक्ति मोर्चा ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में ये विषय राजनीतिक विमर्श का केंद्र रहेंगे। यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन देशव्यापी जनांदोलन का रूप ले सकता है।


