देवघर। देवघर सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी की गई आउटसोर्सिंग निविदा को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। फ्रंटलाइन कंपनी एवं बालाजी कंपनी ने इस निविदा प्रक्रिया को विभागीय मॉडल टेंडर के विरुद्ध बताते हुए माननीय न्यायालय में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विभाग को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था, लेकिन आरोप है कि सिविल सर्जन कार्यालय ने न तो शपथ पत्र दायर किया और न ही अगली सुनवाई का इंतजार किया।
बताया जा रहा है कि सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद बीती रात एक निजी कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया, जिससे पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बीच अवधि में दोबारा निकाली गई निविदा
जानकारी के अनुसार फ्रंटलाइन कंपनी एवं बालाजी कंपनी पिछले कुछ समय से देवघर सिविल सर्जन कार्यालय में आउटसोर्सिंग सेवाओं का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान अचानक कार्यालय द्वारा पुनः नई निविदा जारी कर दी गई। आरोप है कि यह निविदा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित विभागीय मॉडल टेंडर के अनुरूप नहीं थी।
निविदा की शर्तों में ऐसे प्रावधान जोड़े गए, जिनसे किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने की मंशा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इन्हीं कारणों से फ्रंटलाइन और बालाजी कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय का आदेश और विभाग की चुप्पी
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद माननीय न्यायालय ने सिविल सर्जन कार्यालय को निर्देश दिया था कि वह पूरे मामले में शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करे। न्यायालय ने अगली सुनवाई की तारीख 16 जनवरी तय की थी।
लेकिन आरोप है कि सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा अब तक न्यायालय में कोई शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि विभाग न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना कर रहा है।
रातों-रात चयन और वर्क ऑर्डर
सबसे गंभीर आरोप यह है कि न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद बिना किसी सुनवाई के बीती रात एक कंपनी का चयन कर उसे वर्क ऑर्डर दे दिया गया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब अगली सुनवाई कुछ ही दिनों में होनी है।
इस फैसले ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। जानकारों का मानना है कि जब कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन हो, तब तक विभाग को यथास्थिति बनाए रखनी चाहिए थी।
रिटायरमेंट से पहले लिया गया फैसला
सूत्रों के अनुसार वर्तमान सिविल सर्जन आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि सेवानिवृत्ति से ठीक पहले सभी नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए एक खास कंपनी को चयनित किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्वास्थ्य विभाग के भीतर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। कई कर्मचारियों और संविदा कर्मियों में असंतोष देखा जा रहा है।
जांच की मांग तेज
फ्रंटलाइन कंपनी के एरिया मैनेजर राहुल कुमार का कहना है कि यह पूरा मामला गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तब इस तरह से वर्क ऑर्डर देना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना भी है।
उन्होंने मांग की है कि इस पूरे निविदा प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जब तक न्यायालय का अंतिम फैसला न आ जाए, तब तक दिए गए वर्क ऑर्डर को निरस्त किया जाए।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें 16 जनवरी को होने वाली न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हुई हैं। यदि न्यायालय इस पूरे मामले को गंभीर मानता है, तो विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

