By: Vikash, Mala Mandal
झारखंड के देवघर जिले में पुलिस विभाग द्वारा जनहित की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए पुलिस कर्मियों को जीवन रक्षक तकनीकों से लैस करने के उद्देश्य से CPR (कार्डियोपलमोनरी रिससिटेशन) पर एक विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आज प्रातः 10:00 बजे पुलिस केन्द्र, देवघर स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित हुआ, जिसमें एम्स, देवघर के अनुभवी चिकित्सकों एवं उनकी टीम ने भाग लेकर पुलिस जवानों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने की महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया।

करीब डेढ़ घंटे तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न थानों से आए एक-एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) और एक-एक आरक्षी ने भाग लिया। इसके अलावा बाबा मंदिर थाना के सभी पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी, जो ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त नहीं थे, उन्होंने भी पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में भागीदारी निभाई। प्रशिक्षण के दौरान पुलिस कर्मियों में सीखने की उत्सुकता साफ तौर पर देखी गई।

कार्यक्रम के दौरान एम्स, देवघर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अचानक हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) जैसी गंभीर आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में पहले कुछ मिनट, जिन्हें “गोल्डन ऑवर” कहा जाता है, अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान सही तकनीक से CPR दिया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।

प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए चिकित्सकों ने डमी (प्रैक्टिकल मॉडल) का उपयोग कर CPR की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शित किया। उन्होंने छाती पर दबाव (Chest Compression), सांस देने (Rescue Breathing) और सही रिद्म बनाए रखने के तरीकों को विस्तार से समझाया। इसके बाद सभी पुलिस कर्मियों को स्वयं डमी पर अभ्यास करने का अवसर दिया गया, जिससे वे इस तकनीक को व्यवहारिक रूप से समझ सकें।

इस प्रशिक्षण में एम्स, देवघर से प्रोजेक्ट हेड डॉ. राखी गौड़, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. अंजलि सॉ, प्रोफेसर डॉ. नितिन तथा नर्सिंग ऑफिसर मिस एकता ने सक्रिय भूमिका निभाई और अपने अनुभव साझा करते हुए पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया। चिकित्सकों ने यह भी बताया कि CPR केवल चिकित्सा पेशेवरों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक आवश्यक कौशल है, जिसे सीखकर कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

पुलिस अधीक्षक महोदय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस बल अक्सर किसी भी दुर्घटना या आपातकालीन स्थिति में सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचता है। ऐसे में यदि पुलिस कर्मियों को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीकों का ज्ञान हो, तो वे मौके पर ही प्राथमिक उपचार देकर किसी व्यक्ति की जान बचा सकते हैं। उन्होंने इसे पुलिस की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पुलिस बल की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जवाबदेही को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने एम्स, देवघर के चिकित्सकों और उनकी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह प्रयास अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।
देवघर पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनहितकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाएगा, ताकि पुलिस कर्मियों को आधुनिक तकनीकों और आपातकालीन सेवाओं के प्रति जागरूक और सक्षम बनाया जा सके। इससे न केवल पुलिस बल की दक्षता में वृद्धि होगी, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

इस प्रकार का प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में जागरूकता फैलाने और जीवन रक्षक कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि अधिक से अधिक लोग CPR जैसी तकनीकों को सीखें, तो अचानक होने वाली हृदय संबंधी घटनाओं में मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
देवघर पुलिस और एम्स, देवघर की यह संयुक्त पहल न केवल एक सफल आयोजन साबित हुई, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करते हैं, तो समाज को वास्तविक लाभ मिलता है।

