By: Vikash Kumar (Vicky)
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक मिडिल स्कूल से जुड़ा एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां करीब 35 बच्चों द्वारा अपनी कलाई काटने की घटना प्रकाश में आई है। बताया जा रहा है कि यह घटना लगभग 20 दिन पहले की है, लेकिन हाल ही में अभिभावकों द्वारा पंचायत में मुद्दा उठाए जाने के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों ने किसी अज्ञात कारण या कथित दबाव के चलते अपनी कलाई पर ब्लेड या नुकीली वस्तु से कट लगाए। हालांकि, इस बात की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि बच्चों ने यह कदम किसी मानसिक दबाव, आपसी चुनौती, ऑनलाइन ट्रेंड या स्कूल के भीतर किसी अन्य कारण से उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के हाथों पर कट के निशान देखने के बाद जब उनसे पूछताछ की गई, तो उन्होंने स्कूल में किसी ‘चैलेंज’ या ‘समूह दबाव’ की बात कही। हालांकि, बच्चों के बयान अलग-अलग बताए जा रहे हैं, जिससे सटीक कारणों का पता लगाना अभी बाकी है। अभिभावकों ने पंचायत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

ग्राम पंचायत स्तर पर हुई बैठक में अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की कि बच्चों की काउंसलिंग कराई जाए और स्कूल परिसर में निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और संबंधित स्कूल प्रबंधन से रिपोर्ट तलब की गई।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बच्चों की मेडिकल जांच और मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था भी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रारंभिक स्तर पर कुछ बच्चों की जांच की है और बताया गया है कि अधिकांश चोटें सतही हैं, लेकिन मानसिक स्थिति की जांच आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चे अक्सर भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं। यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन और संवाद का अवसर न मिले तो वे गलत कदम उठा सकते हैं। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर खतरनाक ‘चैलेंज’ ट्रेंड और समूह दबाव जैसी प्रवृत्तियां भी सामने आई हैं, जो बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, इस मामले में अभी किसी ऑनलाइन ट्रेंड की पुष्टि नहीं हुई है।
स्कूल प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावकों को सूचित किया गया था और बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया गया। प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि स्कूल में किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न नहीं होता है। हालांकि, अभिभावक इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

पुलिस प्रशासन ने भी एहतियातन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता या किसी प्रकार के उकसावे की बात सामने आती है तो विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस बच्चों और शिक्षकों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है।
यह घटना शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्कूलों में नियमित काउंसलिंग सत्र, अभिभावक-शिक्षक संवाद और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने और उनकी समस्याओं को सुनने की संस्कृति विकसित करना समय की मांग है।
स्थानीय समाजसेवियों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और प्रशासन से अपील की है कि घटना के मूल कारणों को सार्वजनिक किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने स्कूलों में ‘एंटी-बुलिंग नीति’ और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

फिलहाल, पूरे धमतरी जिले में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी।

जब तक जांच पूरी नहीं होती, प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्कूलों को सतर्क रहने और बच्चों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। यह मामला न केवल धमतरी बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

