By: Vikash Kumar ( Vicky)
नई दिल्ली। सरकार अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुफ्त राशन योजना के तहत अंगूठा लगाने की अनिवार्यता को खत्म करते हुए सरकार अगले महीने डिजिटल फूड कूपन या डिजिटल फूड करेंसी का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को मोबाइल फोन पर डिजिटल कूपन दिए जाएंगे, जिन्हें वे राशन दुकानों पर QR कोड स्कैन कर रिडीम कर सकेंगे।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस पायलट प्रोजेक्ट को पहले चरण में चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के तीन चयनित जिलों में लागू किया जाएगा। योजना के सफल रहने पर इसे देशभर में लागू करने की तैयारी है। यह पहल न केवल राशन वितरण को आसान बनाएगी, बल्कि फर्जीवाड़े और लीकेज पर भी रोक लगाने में मददगार साबित हो सकती है।
डिजिटल फूड कूपन क्या है?
डिजिटल फूड कूपन एक तरह की इलेक्ट्रॉनिक करेंसी होगी, जिसे खास तौर पर मुफ्त राशन योजना के लिए तैयार किया गया है। लाभार्थियों के मोबाइल नंबर से यह कूपन लिंक रहेगा। हर महीने तय मात्रा में राशन के बराबर डिजिटल कूपन उनके मोबाइल वॉलेट या सरकारी ऐप में ट्रांसफर किए जाएंगे। इन्हें सिर्फ अधिकृत राशन दुकानों पर ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

QR कोड से मिलेगा राशन
नई व्यवस्था में राशन लेने के लिए न तो अंगूठा लगाना होगा और न ही बायोमेट्रिक मशीन की जरूरत पड़ेगी। राशन दुकानों पर एक QR कोड लगाया जाएगा। लाभार्थी अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन करेंगे और डिजिटल कूपन के जरिए राशन प्राप्त कर सकेंगे। इससे नेटवर्क फेल होने, फिंगरप्रिंट न मिलने और मशीन खराब होने जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार का कहना है कि डिजिटल फूड कूपन से पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को समय पर राशन मिलेगा। इसके अलावा, बुजुर्गों, मजदूरों और उन लोगों को राहत मिलेगी जिनके फिंगरप्रिंट अक्सर मशीन में मैच नहीं होते। डिजिटल सिस्टम से डेटा रियल-टाइम में अपडेट होगा, जिससे सरकार को योजना की निगरानी में भी मदद मिलेगी।

किन लोगों को होगा फायदा?
इस योजना का सीधा फायदा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आने वाले करोड़ों लाभार्थियों को मिलेगा। खासकर शहरी इलाकों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए यह सिस्टम बेहद उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि मोबाइल के जरिए कहीं से भी पहचान संभव होगी।
क्या खत्म हो जाएगी ई-KYC की जरूरत?
फिलहाल सरकार पूरी तरह से ई-KYC को खत्म नहीं कर रही है। शुरुआती चरण में आधार से लिंक मोबाइल नंबर जरूरी रहेगा, ताकि डिजिटल कूपन सुरक्षित तरीके से लाभार्थी तक पहुंच सके। हालांकि, भविष्य में सरकार इसमें और भी विकल्प जोड़ सकती है।

राशन दुकानदारों के लिए क्या बदलेगा?
राशन दुकानदारों को भी इस नए सिस्टम के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें QR कोड स्कैनिंग, डिजिटल वेरिफिकेशन और कूपन रिडेम्पशन की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। इससे दुकानदारों का हिसाब-किताब भी डिजिटल हो जाएगा और भुगतान में पारदर्शिता आएगी।
पायलट प्रोजेक्ट क्यों जरूरी?
सरकार इस योजना को पूरे देश में लागू करने से पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इसकी व्यवहारिकता परखना चाहती है। पायलट के दौरान तकनीकी दिक्कतें, लाभार्थियों की प्रतिक्रिया और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों का आकलन किया जाएगा।

भविष्य में क्या होगा बदलाव?
अगर डिजिटल फूड कूपन सिस्टम सफल रहता है, तो आने वाले समय में राशन कार्ड की भूमिका भी सीमित हो सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जरूरतमंद को सीधे, आसान और बिना किसी बाधा के खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।
कुल मिलाकर, डिजिटल फूड कूपन योजना भारत के राशन वितरण सिस्टम में एक बड़ा डिजिटल बदलाव साबित हो सकती है। इससे न केवल लाभार्थियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकार के लिए भी यह योजना ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।

