By: Vikash Kumar (Vicky)
देश के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालने वाली खबर यह है कि आने वाले दिनों में स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है। कच्चे माल की लागत बढ़ने, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, आयात शुल्क और वैश्विक सप्लाई चेन में दबाव के चलते कंपनियां दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसका असर मिडिल क्लास से लेकर लोअर इनकम ग्रुप तक सभी पर पड़ेगा।

क्यों बढ़ रही हैं इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें?
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़े जानकारों के मुताबिक कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई अहम वजहें हैं। सबसे बड़ी वजह कंपोनेंट्स की लागत में इजाफा है।
स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाले
सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले पैनल, बैटरी और चिपसेट की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हैं। चूंकि भारत अभी भी बड़ी मात्रा में इन पार्ट्स का आयात करता है, इसलिए लागत का सीधा असर फाइनल प्रोडक्ट की कीमत पर पड़ता है।
डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया
दूसरी बड़ी वजह रुपये का कमजोर होना है। डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव से आयात महंगा हो जाता है। कंपनियों को कंपोनेंट्स खरीदने के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ता है, जिसकी भरपाई वे उपभोक्ताओं से कीमत बढ़ाकर करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रुपये में मजबूती नहीं आई, तो आने वाले महीनों में दाम और बढ़ सकते हैं।
आयात शुल्क और टैक्स का असर
सरकार की ओर से कुछ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर आयात शुल्क (Import Duty) और टैक्स में बदलाव भी कीमतों को प्रभावित कर रहा है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कई बार आयात शुल्क बढ़ाया जाता है, ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को फायदा मिले। हालांकि, जब तक देश में पूरी सप्लाई चेन मजबूत नहीं होती, तब तक इसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
स्मार्टफोन की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी संभव?
स्मार्टफोन बाजार में सबसे ज्यादा हलचल देखने को मिल सकती है। एंट्री लेवल और मिड-रेंज स्मार्टफोन, जिनकी कीमत 10 हजार से 25 हजार रुपये के बीच होती है, उनमें 3 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव बताई जा रही है। वहीं प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। कंपनियां पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि नए मॉडल लॉन्च के साथ कीमतों में संशोधन किया जाएगा।

टीवी और लैपटॉप भी होंगे महंगे
केवल स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि एलईडी टीवी और लैपटॉप भी महंगे होने वाले हैं। टीवी में इस्तेमाल होने वाले पैनल और बैक-लाइट यूनिट की कीमत बढ़ने से 32 इंच से लेकर 55 इंच तक के टीवी की कीमतों में इजाफा तय है। लैपटॉप सेगमेंट में चिपसेट और मेमोरी की कीमत बढ़ने से स्टूडेंट्स और वर्किंग प्रोफेशनल्स पर असर पड़ेगा। खासकर ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम के दौर में लैपटॉप की बढ़ती कीमतें चिंता बढ़ा सकती हैं।
ऑफर्स और सेल से मिल सकती है राहत?
हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी की खबर के बीच उपभोक्ताओं के लिए थोड़ी राहत भी हो सकती है। त्योहारों और ई-कॉमर्स सेल के दौरान कंपनियां डिस्काउंट, बैंक ऑफर्स और एक्सचेंज डील्स के जरिए कुछ हद तक राहत देने की कोशिश कर सकती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये ऑफर्स स्थायी समाधान नहीं हैं और बेस प्राइस बढ़ने से लंबे समय में ग्राहक को ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सलाह?
अगर आप निकट भविष्य में स्मार्टफोन, टीवी या लैपटॉप खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो विशेषज्ञों की सलाह है कि जल्द खरीदारी करना फायदेमंद हो सकता है। कीमतें बढ़ने से पहले मौजूदा ऑफर्स का फायदा उठाना बेहतर रहेगा। इसके अलावा जरूरत और बजट के हिसाब से विकल्प चुनना भी जरूरी है।
सरकार और कंपनियों की रणनीति
सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पीएलआई (PLI) स्कीम के तहत कई कंपनियां भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं। लंबी अवधि में इससे कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। कंपनियां भी लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।
आगे क्या?
कुल मिलाकर आने वाले महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में कीमतों का दबाव बना रह सकता है। वैश्विक हालात, डॉलर-रुपया दर और सरकारी नीतियां तय करेंगी कि यह बढ़ोतरी कितनी लंबी चलेगी। फिलहाल इतना तय है कि स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप खरीदना अब पहले से ज्यादा महंगा सौदा हो सकता है।

