By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली। हर साल बोर्ड परीक्षा के समय लाखों छात्रों और अभिभावकों के मन में एक ही सवाल उठता है कि अगर स्कूल की फीस पूरी जमा नहीं हुई हो, तो क्या स्कूल 10वीं का एडमिट कार्ड रोक सकता है? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि 10वीं बोर्ड परीक्षा छात्र के शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है।

हाल के वर्षों में कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां स्कूलों द्वारा बकाया फीस का हवाला देकर छात्रों को एडमिट कार्ड देने से मना कर दिया गया। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि कानून, शिक्षा बोर्ड और न्यायालय इस विषय में क्या कहते हैं।
बोर्ड परीक्षा और एडमिट कार्ड का महत्व
10वीं बोर्ड परीक्षा का आयोजन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), राज्य बोर्ड और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा किया जाता है। एडमिट कार्ड परीक्षा में शामिल होने का अनिवार्य दस्तावेज होता है, जिसके बिना छात्र परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं कर सकता। ऐसे में एडमिट कार्ड रोकना सीधे तौर पर छात्र के भविष्य से जुड़ा मामला बन जाता है।

स्कूल का तर्क क्या होता है?
अक्सर निजी स्कूल यह तर्क देते हैं कि अभिभावकों ने समय पर फीस जमा नहीं की, इसलिए स्कूल प्रशासन को एडमिट कार्ड रोकने का अधिकार है। स्कूलों का कहना होता है कि फीस से ही शिक्षकों का वेतन, स्कूल का रखरखाव और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं संचालित होती हैं।
कानून और शिक्षा बोर्ड क्या कहते हैं?
CBSE और कई राज्य शिक्षा बोर्डों के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि बोर्ड परीक्षा में बैठने से किसी भी छात्र को केवल फीस के कारण वंचित नहीं किया जा सकता। एडमिट कार्ड बोर्ड द्वारा जारी किया जाता है, न कि स्कूल द्वारा। स्कूल केवल इसे छात्रों तक पहुंचाने का माध्यम होता है।
CBSE के नियमों के अनुसार, यदि छात्र का पंजीकरण बोर्ड में हो चुका है, तो स्कूल उसे परीक्षा में बैठने से नहीं रोक सकता। कई सर्कुलर में यह साफ कहा गया है कि फीस विवाद को परीक्षा से अलग रखा जाना चाहिए।

कोर्ट का क्या कहना है?
देश के विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर कई बार फैसला दिया है। अदालतों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शिक्षा बच्चे का मौलिक अधिकार है और फीस विवाद के कारण छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट जैसे कई न्यायालयों ने आदेश दिया है कि स्कूल एडमिट कार्ड नहीं रोक सकते, भले ही फीस बकाया हो। हालांकि कोर्ट यह भी मानता है कि स्कूल को फीस वसूलने का अधिकार है, लेकिन उसका तरीका कानूनी होना चाहिए।

अगर स्कूल एडमिट कार्ड रोक ले तो क्या करें?
यदि किसी छात्र का स्कूल फीस न जमा होने के कारण एडमिट कार्ड रोक लेता है, तो अभिभावक निम्न कदम उठा सकते हैं—
1. सबसे पहले स्कूल प्रशासन से लिखित में बात करें।
2. स्कूल द्वारा जारी नोटिस या फीस संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
3. जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
4. CBSE या संबंधित बोर्ड की शिकायत पोर्टल पर शिकायत करें।
5. जरूरत पड़ने पर कोर्ट का सहारा लें।

क्या स्कूल फीस वसूल सकता है?
हां, स्कूल को अपनी बकाया फीस वसूलने का पूरा अधिकार है, लेकिन वह परीक्षा या एडमिट कार्ड को दबाव बनाने का जरिया नहीं बना सकता। स्कूल कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस, बातचीत या सिविल केस के माध्यम से फीस की मांग कर सकता है।
अभिभावकों के लिए सलाह
अभिभावकों को चाहिए कि वे समय पर फीस जमा करें और किसी आर्थिक परेशानी की स्थिति में स्कूल प्रशासन को पहले ही सूचित करें। अधिकतर स्कूल किस्तों में फीस जमा करने की सुविधा देते हैं।

फीस जमा नहीं होने की स्थिति में स्कूल 10वीं का एडमिट कार्ड रोक नहीं सकता। बोर्ड परीक्षा में बैठना छात्र का अधिकार है और किसी भी प्रकार का फीस विवाद उसके भविष्य के आड़े नहीं आना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो अभिभावकों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कानून और शिक्षा बोर्ड दोनों ही छात्रों के पक्ष में हैं।
