By: Vikash Kumar (Vicky)
गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पेयजल के कारण टाइफाइड के मामलों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। शहर के कई इलाकों से बुखार, पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी की शिकायतें सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। प्रारंभिक जांच में अब तक करीब 100 टाइफाइड के संदिग्ध मामलों की पुष्टि की गई है, जिससे प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गांधीनगर प्रशासन को युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दूषित पानी की आपूर्ति के जिम्मेदारों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
दूषित पानी बना बीमारी की वजह
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक गांधीनगर के कुछ रिहायशी इलाकों में सप्लाई किए जा रहे पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है। आशंका जताई जा रही है कि पुरानी पाइपलाइन, लीकेज और सीवरेज लाइन से मिलावट के कारण पानी दूषित हुआ है। इसी पानी के सेवन से लोगों में टाइफाइड जैसे गंभीर संक्रमण फैलने लगे।
डॉक्टरों का कहना है कि टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होती है और दूषित पानी या भोजन इसके फैलने का सबसे बड़ा कारण है। समय पर इलाज न होने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
गांधीनगर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले कुछ दिनों में बुखार के मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। कई मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, जबकि संदिग्ध मामलों के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रहने और टाइफाइड की जांच अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं।

अमित शाह के सख्त निर्देश
गांधीनगर से सांसद और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से ठोस कदम उठाने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि—
दूषित जल आपूर्ति को तुरंत बंद किया जाए
प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
पानी के सैंपल की व्यापक जांच हो
पाइपलाइन और जलापूर्ति नेटवर्क का तकनीकी ऑडिट कराया जाए
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई हो
अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासन अलर्ट मोड में
अमित शाह के निर्देशों के बाद गांधीनगर नगर निगम, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। प्रभावित इलाकों में पानी के टैंकर भेजे जा रहे हैं, क्लोरीनेशन बढ़ाया गया है और घर-घर जाकर स्वास्थ्य टीम सर्वे कर रही है।
नगर निगम ने लोगों से अपील की है कि वे—
उबला हुआ पानी ही पिएं
बाहर का खुला खाना खाने से बचें
बुखार या कमजोरी होने पर तुरंत जांच कराएं
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और नगर निगम पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि नियमित जलापूर्ति जांच और मेंटेनेंस की अनदेखी के कारण यह स्थिति बनी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पाइपलाइन की जांच होती, तो बीमारी फैलने से रोकी जा सकती थी।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी इलाकों में दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा होती हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि—
जलापूर्ति प्रणाली का नियमित ऑडिट
मानसून से पहले विशेष जांच अभियान
नागरिकों को जागरूक करने के लिए हेल्थ कैंप
जैसे कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं।
सख्त निर्देशों का क्या है संदेश?
अमित शाह द्वारा दिए गए सख्त निर्देश यह संकेत देते हैं कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है। यह न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे राज्य के लिए संदेश है कि जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि निर्देशों का सही ढंग से पालन हुआ, तो न सिर्फ वर्तमान संकट पर काबू पाया जा सकता है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकती है।
