By:vikash kumar (vicky)

Tips to Buy Good Clay Pot: गर्मियों का मौसम आते ही लोग ठंडा और ताजा पानी पीने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं। आजकल लगभग हर घर में फ्रिज मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद बहुत से लोग गर्मियों में मिट्टी के मटके का पानी पीना पसंद करते हैं। मिट्टी के घड़े में रखा पानी न सिर्फ प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है बल्कि इसे सेहत के लिए भी बेहतर माना जाता है।

ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक, जैसे ही तापमान बढ़ने लगता है लोग बाजार से मिट्टी का घड़ा या मटका खरीदने लगते हैं। इसे कई लोग प्यार से “देसी फ्रिज” भी कहते हैं क्योंकि यह बिना बिजली के ही पानी को ठंडा रखने की क्षमता रखता है।

हालांकि बाजार में मिलने वाले सभी मटके एक जैसे नहीं होते। अगर मटका सही तरीके से तैयार नहीं किया गया हो या उसकी मिट्टी में मिलावट हो तो वह पानी को ठीक से ठंडा नहीं कर पाता। इतना ही नहीं, खराब गुणवत्ता वाला मटका जल्दी टूट भी सकता है। इसलिए मटका खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है।

मटके की बनावट और फिनिशिंग जरूर जांचें
जब भी मिट्टी का घड़ा खरीदें तो सबसे पहले उसकी बनावट को ध्यान से देखें। मटके को चारों तरफ से हाथ लगाकर जांचना चाहिए कि कहीं उसमें दरार तो नहीं है। उसकी सतह बहुत ज्यादा खुरदरी या टूटी हुई नहीं होनी चाहिए।

साथ ही यह भी ध्यान रखें कि मटका हर तरफ से एकसमान मोटाई का हो। अगर कहीं से पतला और कहीं से ज्यादा मोटा होगा तो उसमें दरार आने या टूटने का खतरा बढ़ सकता है। अच्छी फिनिशिंग वाला मटका ज्यादा समय तक टिकाऊ रहता है।

मटके के रंग पर भी दें ध्यान
मिट्टी के मटके का प्राकृतिक रंग आमतौर पर हल्का लाल, भूरा या बादामी होता है। ऐसे रंग के मटके प्राकृतिक मिट्टी से बने होते हैं और इनमें किसी तरह की मिलावट होने की संभावना कम होती है।
बहुत ज्यादा चमकीले या गहरे लाल रंग के मटकों को खरीदने से बचना चाहिए क्योंकि कई बार इन पर केमिकल वाले रंगों का लेप किया जाता है। इससे पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
आवाज से पहचानें मटके की गुणवत्ता
मटका खरीदते समय उसकी गुणवत्ता जांचने का एक पुराना और आसान तरीका है उसकी आवाज को सुनना। इसके लिए मटके को उंगली से हल्के से ठकठकाएं।
अगर मटके से साफ और हल्की ‘टन-टन’ जैसी आवाज आती है तो समझना चाहिए कि मिट्टी अच्छी तरह से पकी हुई है और मटका मजबूत है। वहीं अगर आवाज भारी या दबे हुए स्वर में आती है तो यह संकेत हो सकता है कि मटका पूरी तरह पका नहीं है या उसमें बारीक दरार हो सकती है।
प्राकृतिक छिद्र होना जरूरी
मिट्टी के घड़े में पानी ठंडा होने का मुख्य कारण वाष्पीकरण (Evaporation) की प्रक्रिया होती है। मटके की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे प्राकृतिक छिद्रों से थोड़ा पानी बाहर निकलता है और उसी प्रक्रिया से पानी ठंडा होता है।
अगर मटका बहुत ज्यादा पॉलिश किया हुआ या पेंट किया हुआ होगा तो ये छिद्र बंद हो सकते हैं। ऐसे मटकों में पानी उतना ठंडा नहीं हो पाता जितना प्राकृतिक मिट्टी वाले मटकों में होता है।

आकार और ढक्कन का भी रखें ध्यान
मटका खरीदते समय उसके आकार को अपनी जरूरत के अनुसार चुनना चाहिए। परिवार बड़ा है तो थोड़ा बड़ा मटका लेना बेहतर रहेगा ताकि बार-बार पानी भरने की जरूरत न पड़े।
साथ ही मटके का मुंह इतना चौड़ा होना चाहिए कि उसे अंदर से साफ करना आसान हो। इसके अलावा मटके के साथ ढक्कन होना भी जरूरी है ताकि पानी साफ और सुरक्षित रह सके।
क्यों बेहतर है मटके का पानी
मिट्टी के घड़े में रखा पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है और इसमें मिट्टी के कुछ प्राकृतिक खनिज भी मिल सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे फ्रिज के ठंडे पानी से बेहतर मानते हैं। गर्मियों में मटके का पानी पीने से शरीर को हल्की ठंडक मिलती है और प्यास भी जल्दी शांत होती है।
यह लेख सामान्य जानकारी और पारंपरिक अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी समस्या या विशेष स्थिति में डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
