By: Vikash Kumar (Vicky)
देश के सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। खास तौर पर चांदी ने नया इतिहास रचते हुए 3 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर लिया है, जबकि सोना भी अपने ऊंचे भाव पर मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती, डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते कीमती धातुओं की कीमतों में यह उछाल देखने को मिल रहा है।

आज के कारोबार में चांदी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों दोनों का ध्यान खींचा है। चांदी लंबे समय से औद्योगिक मांग और निवेश के दोहरे दबाव में बनी हुई थी, लेकिन अब इसमें तेज खरीदारी देखने को मिल रही है। बाजार जानकारों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर सप्लाई की कमी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की बढ़ती खपत इसकी कीमतों को ऊपर ले जा रही है।
सोने की बात करें तो आज गोल्ड प्राइस भी मजबूत बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में स्थिरता और घरेलू बाजार में बढ़ती मांग के कारण सोना ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। शादी-विवाह के सीजन की शुरुआत और निवेशकों का झुकाव सुरक्षित विकल्पों की ओर होने से सोने की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशक शेयर बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए सोने और चांदी में निवेश को तरजीह दे रहे हैं। यही वजह है कि दोनों कीमती धातुओं में लगातार तेजी का माहौल बना हुआ है। खास तौर पर चांदी में आई तेजी ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि यह स्तर ऐतिहासिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कारणों की बात करें तो अमेरिका और यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और भू-राजनीतिक तनाव सोने-चांदी की कीमतों को मजबूती दे रहे हैं। जब भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी का रुख करते हैं। इसका सीधा असर घरेलू बाजार में कीमतों पर देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय अब भी अहम माना जा रहा है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है, वे गिरावट के दौरान खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं।

ज्वेलरी कारोबार पर नजर डालें तो ऊंचे दामों के बावजूद मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। हालांकि, आम ग्राहक अब हल्के वजन के गहनों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहा है। दूसरी ओर, निवेश के लिहाज से गोल्ड कॉइन और बार की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
चांदी की कीमतों में आई तेजी का असर औद्योगिक सेक्टर पर भी पड़ सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में कीमतें बढ़ने से इन सेक्टरों की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
अगर निवेश की रणनीति की बात करें तो बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने और चांदी में निवेश करते समय पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सिर्फ भाव बढ़ने के आधार पर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। इसके बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
कुल मिलाकर, सोने और चांदी के दामों में लगी यह ‘आग’ फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। चांदी का 3 लाख रुपये के पार जाना बाजार के लिए एक बड़ा संकेत है, जबकि सोना भी मजबूत सपोर्ट के साथ कारोबार कर रहा है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और घरेलू मांग यह तय करेगी कि कीमती धातुएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।

