By: Vikash Kumar (Vicky)
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मतलूपुर गांव के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वर्षों से चल रहे उनका उल्लेखनीय योगदान देने के लिए प्रदान किया गया है, जिससे न सिर्फ बिहार बल्कि देशभर के कृषि समुदाय को लाभ मिला है।

पद्म श्री भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और इसे उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता, सेवा और नवाचार के द्वारा समाज और राष्ट्र के लिए अद्वितीय योगदान दिया है। इस बार डॉ. त्रिवेदी के नाम के साथ ही बिहार से कला व लोक संस्कृति के क्षेत्र के मान्यवरों का भी सम्मान किया गया, जिससे राज्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर गौरव का अनुभव बढ़ा है।
गोपालजी त्रिवेदी का संक्षिप्त परिचय
डॉ. गोपालजी त्रिवेदी मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के मतलूपुर गांव से ताल्लुक रखते हैं और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने कृषि अनुसंधान, आधुनिक खेती के तकनीकी समाधान तथा किसानों को व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान करने के कार्यों के लिए वर्षों लगाया है। शुरुआती शिक्षा गांव के विद्यालयों में पूरी करने के बाद, त्रिवेदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, विभाग निदेशक और अंततः 1988 से 1991 तक कुलपति के पद पर कार्यरत रहे।

बाद सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने शहरों के बजाय अपने गांव को ही अपनी कर्मभूमि बनाया और वहाँ के किसान समुदाय के साथ मिलकर कृषि व मत्स्य पालन के क्षेत्र में नवीन और लाभकारी तकनीकों को अपनाया।
कृषि में योगदान और किसानों पर प्रभाव
डॉ. त्रिवेदी का कृषि क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है:
लीची और मखाना खेती में सुधार
उन्होंने मतलूपुर समेत पूरे मुजफ्फरपुर क्षेत्र में लीची एवं मखाना फलोत्पादन पर वैज्ञानिक आधारित तकनीकी अपनाई, जिससे किसानों की पैदावार, गुणवत्ता और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

समेकित कृषि प्रणालियाँ
मतलूपुर के पास 85 एकड़ भूमि पर बिहार की पहली जल आधारित समेकित कृषि प्रणाली विकसित की, जिसने कृषि के साथ मत्स्य पालन (फिशरी) को संयोजित किया और किसान समुदाय को नए आय के स्रोत प्रदान किए।
‘बाबा’ संस्था की स्थापना
किसानों को प्रशिक्षण,
मार्गदर्शन और वैज्ञानिक खेती के ज्ञान देने के लिए उन्होंने बाबा नामक संस्था की स्थापना की, जो आज भी कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रूप से सेवा दे रही है।

मतलूपुर में उत्सव और प्रतिक्रिया
डॉ. त्रिवेदी के सम्मान की खबर मिलते ही मतलूपुर और आसपास के इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय किसान, ग्रामीण और युवा सभी ने मिलकर जश्न मनाया तथा कृषि विज्ञान में उनके योगदान के लिए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनके समर्थकों का कहना है कि “इस सम्मान से न केवल डॉ. त्रिवेदी का व्यक्तिगत गौरव बढ़ा है, बल्कि बिहार के कृषि क्षेत्र की छवि भी राष्ट्रीय स्तर पर और प्रतिस्पर्धात्मक रूप से उभरी है।”

पद्म श्री का महत्व
पद्म श्री पुरस्कार भारत सरकार द्वारा राष्ट्र सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। यह सम्मान विज्ञान, शिक्षा, कला, सेवा, खेल और उद्योग जैसे क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों को दिया जाता है। डॉ. त्रिवेदी को विशेष तौर पर कृषि व वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नवीनता और किसान-केंद्रित कार्यों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया है।

आगे की अपेक्षाएँ
डॉ. त्रिवेदी के सम्मान से उम्मीद है कि बिहार समेत पूरे भारत के कृषि शिक्षण संस्थानों में युवाओं की रुचि कृषि अनुसंधान और तकनीकी कृषि अपनाने की ओर और बढ़ेगी। उनके जैसा नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को वैज्ञानिक खेती के प्रति उत्साहित करेगा और कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करेगा।

अंत में
डॉ. गोपालजी त्रिवेदी की यात्रा एक सरल किसान के बेटे से लेकर राष्ट्रीय-स्तरीय सम्मानित कृषि वैज्ञानिक तक की प्रेरणादायक कहानी है। उनकी उपलब्धियाँ न सिर्फ़ मुजफ्फरपुर, बल्कि पूरे बिहार और भारतीय कृषि विज्ञान के लिए एक मिसाल हैं।
इस प्रतिष्ठित सम्मान से स्पष्ट होता है कि जब विज्ञान और ग्रामीण जीवन मिलकर एक दिशा में कार्य करते हैं, तो परिणाम केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज-और अर्थव्यवस्था-पर आधारित परिवर्तन में परिणत होता है।

