
नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम फैसलों के लिए गठित जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक आज 3 सितंबर से राजधानी दिल्ली में शुरू हो गई है। यह बैठक दो दिन तक चलेगी, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल होंगे। इस बैठक को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें जीएसटी रेट्स में बदलाव और चार की जगह दो टैक्स स्लैब लागू करने पर अंतिम मुहर लग सकती है।
बैठक का एजेंडा
काउंसिल के एजेंडे में कई बड़े मुद्दे शामिल हैं। इनमें सबसे प्रमुख है –
जीएसटी टैक्स स्लैब का सरलीकरण
नए कर ढांचे पर निर्णय
राज्यों की मुआवजा राशि का मुद्दा
ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग पर टैक्स का ढांचा
वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों का पुनर्निर्धारण
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार चाहती है कि मौजूदा जटिल टैक्स स्लैब को सरल बनाया जाए। फिलहाल जीएसटी में चार प्रमुख दरें हैं – 5%, 12%, 18% और 28%। सरकार इन्हें घटाकर केवल दो स्लैब (8% और 16% के आसपास) करने पर विचार कर रही है।

राज्यों के हितों पर भी रहेगा जोर
बैठक में राज्यों के हितों का भी ख्याल रखा जाएगा। झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें राजस्व हानि की भरपाई केंद्र करे। इन राज्यों का कहना है कि जीएसटी लागू होने से पहले उनकी आय में जो स्थिरता थी, वह अब प्रभावित हुई है।
वहीं, औद्योगिक राज्य गुजरात और महाराष्ट्र का जोर है कि टैक्स ढांचे को सरल किया जाए, ताकि व्यापार और उद्योग को सहूलियत मिले।
विशेषज्ञों की राय
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जीएसटी स्लैब की संख्या घटाई जाती है, तो इससे न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी कर ढांचे को समझने में आसानी होगी। इससे टैक्स चोरी की संभावनाएं भी कम होंगी।
प्रोफेसर आर.के. शर्मा, अर्थशास्त्री, का कहना है कि –
“जीएसटी को सरल करना समय की मांग है। चार की जगह दो स्लैब होने से कर संरचना स्पष्ट होगी और टैक्स कलेक्शन बढ़ने की संभावना है।”
व्यापारियों और उपभोक्ताओं की उम्मीदें
छोटे व्यापारी चाहते हैं कि कंपोजीशन स्कीम की सीमा और बढ़ाई जाए, ताकि ज्यादा कारोबारी इसके दायरे में आ सकें।
उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि अगर टैक्स स्लैब घटाकर 8% और 16% किया जाता है, तो दैनिक उपयोग की वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
ऑनलाइन गेमिंग और ई-कॉमर्स सेक्टर को डर है कि नए टैक्स नियम उनके कारोबार पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं।
बैठक के बाद का असर
इस बैठक में होने वाले फैसलों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर पड़ेगा। जीएसटी काउंसिल की हर बैठक से बाजार में हलचल मच जाती है क्योंकि यह टैक्स दरों और कारोबारी माहौल को सीधे प्रभावित करती है।
अगर दो टैक्स स्लैब लागू होते हैं तो यह स्वतंत्र भारत के टैक्स इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
राजनीतिक दृष्टिकोण
राज्यों के वित्त मंत्री भी इस बैठक को राजनीतिक नजरिये से देख रहे हैं। कई विपक्षी शासित राज्यों का कहना है कि केंद्र सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। वहीं, केंद्र सरकार का तर्क है कि जीएसटी परिषद एक संवैधानिक संस्था है और सभी फैसले सहमति से लिए जाते हैं।जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक से देश को कई बड़े फैसलों की उम्मीद है। अगर टैक्स स्लैब में बदलाव होता है तो इसका असर हर नागरिक पर पड़ेगा। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगपति और आम उपभोक्ता—सभी की नजरें दिल्ली में हो रही इस बैठक पर टिकी हैं।


