By: Vikash Kumar (Vicky)
हिंदू धर्म में नवरात्रि को शक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। सालभर में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे प्रसिद्ध हैं, जबकि दो नवरात्रि गुप्त रूप से मनाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है माघ गुप्त नवरात्रि, जो तंत्र साधना, गुप्त उपासना और सिद्धि प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। माघ गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व साधकों, तांत्रिकों और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए होता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, लेकिन यह पूजा सार्वजनिक रूप से नहीं बल्कि गोपनीय तरीके से की जाती है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

Gupt Navratri 2026 January: कब से कब तक मनाई जाएगी
वर्ष 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होगी और नवमी तिथि तक चलेगी। इस प्रकार यह पर्व नौ दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाएगी। साधक इस दौरान उपवास, ध्यान, जप और विशेष अनुष्ठान करते हैं।
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
गुप्त नवरात्रि को सामान्य नवरात्रि से अलग माना जाता है क्योंकि इसमें विशेष रूप से तांत्रिक साधनाएं, मंत्र जप, यंत्र स्थापना और देवी उपासना की जाती है। माना जाता है कि इस समय में की गई साधना जल्दी फल देती है और व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।
माघ गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि
इस नवरात्रि में सबसे पहले कलश स्थापना की जाती है, जिसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीप जलाया जाता है और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या सिद्ध मंत्रों का पाठ किया जाता है। भक्त प्रतिदिन सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करते हैं और मां को फल, फूल, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करते हैं। जो लोग विशेष साधना करना चाहते हैं वे इस दौरान रुद्राक्ष माला से “ॐ दुं दुर्गायै नमः” या “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप करते हैं। रात के समय ध्यान और साधना करना भी शुभ माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि के शुभ मुहूर्त
माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त को पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कलश स्थापना के लिए प्रतिपदा तिथि का प्रातः काल सबसे उत्तम समय होता है। इसके अलावा नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
किन लोगों को यह व्रत रखना चाहिए
जिन लोगों को आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव, नौकरी में बाधा या वैवाहिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए यह नवरात्रि विशेष लाभकारी मानी जाती है। विद्यार्थी, व्यापारी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले लोग भी इस दौरान मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय गणनाओं और पारंपरिक ग्रंथों पर आधारित है। इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

