कभी सोचा है, लाल ही क्यों होता है भारत में ज्यादातर Letter Box का रंग? जानिए इसकी दिलचस्प वजह।
भारत में जहां भी नज़र डालें, डाकघर के लेटर बॉक्स का रंग अधिकतर लाल ही नजर आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन्हें लाल रंग में ही क्यों रंगा जाता है? इसके पीछे एक दिलचस्प और व्यवहारिक कारण छिपा है, जिसे कम ही लोग जानते हैं।
डाक विभाग यानी इंडिया पोस्ट का इतिहास 1854 में ब्रिटिश शासन काल से शुरू हुआ। तब से लेकर अब तक लेटर बॉक्स के रंग में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इसका प्रमुख कारण है – लाल रंग की विशेषता।
दरअसल, लाल रंग की सबसे बड़ी खूबी है कि यह दूर से भी साफ-साफ नजर आता है। जब ब्रिटिश काल में डाक व्यवस्था को संगठित किया गया, तब घुड़सवार डाक सेवक और साइकिल पर चलने वाले पोस्टमैन को दूर से ही लेटर बॉक्स दिख जाए, इसलिए इसका रंग लाल रखा गया।
मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक वजह:
लाल रंग को चेतावनी और ध्यान खींचने वाले रंग के तौर पर भी जाना जाता है। ट्रैफिक सिग्नल, फायर ब्रिगेड या इमरजेंसी संकेतों में भी यही रंग प्रमुखता से इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह आंखों को तुरंत दिखाई देता है। यही वजह है कि लेटर बॉक्स भी इसी रंग में रंगे गए ताकि लोग इन्हें नजरअंदाज न कर सकें।
आज भी कायम है परंपरा:
हालांकि आज के डिजिटल युग में चिट्ठियों का चलन कम हो गया है, लेकिन गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक डाक विभाग की पहचान वही लाल लेटर बॉक्स बना हुआ है। ये न सिर्फ भारतीय डाक सेवा की परंपरा का प्रतीक हैं, बल्कि एक दौर की यादें भी समेटे हुए हैं।
