आज के समय में हार्ट अटैक एक गंभीर लेकिन काफी हद तक काबू में लाई जा सकने वाली मेडिकल इमरजेंसी बन चुकी है। बदलती जीवनशैली, तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि मेडिकल टेक्नोलॉजी, समय पर इलाज और लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के आंकड़ों में पहले की तुलना में कमी आई है।

हार्ट अटैक के बाद बचने का प्रतिशत कितना होता है
डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद मरीज के बचने का प्रतिशत कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे अटैक की गंभीरता, मरीज की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां और इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ। रिसर्च बताती है कि अगर मरीज को हार्ट अटैक आने के एक घंटे के भीतर यानी गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो 80 से 90 प्रतिशत तक सर्वाइवल की संभावना रहती है। इलाज में देरी होने पर यह संभावना तेजी से कम हो जाती है।
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण पहचानना क्यों जरूरी है
हार्ट अटैक के लक्षणों को समय पर पहचानना जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। सीने में दर्द या दबाव, दर्द का बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलना, सांस लेने में तकलीफ, अचानक पसीना आना, घबराहट, मतली या चक्कर आना इसके सामान्य लक्षण हैं। महिलाओं और बुजुर्गों में कई बार लक्षण अलग या हल्के भी हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
हार्ट अटैक के शक में सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए
डॉक्टरों का कहना है कि हार्ट अटैक के लक्षण दिखते ही तुरंत एंबुलेंस बुलानी चाहिए। खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाना जोखिम भरा हो सकता है। एंबुलेंस में मौजूद मेडिकल स्टाफ रास्ते में ही जरूरी प्राथमिक इलाज शुरू कर देता है, जिससे मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
एस्पिरिन और प्राथमिक देखभाल से कैसे बढ़ती है जान बचने की संभावना
अगर मरीज होश में है और उसे किसी तरह की एलर्जी नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार एस्पिरिन चबाने से खून के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। मरीज को शांत रखना, ढीले कपड़े पहनाना और आधी बैठी हुई अवस्था में रखना भी मददगार साबित होता है। घबराहट दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सीपीआर और डिफिब्रिलेटर की भूमिका कितनी अहम है
कुछ मामलों में समय पर सीपीआर और ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल जान बचाने में निर्णायक साबित होता है। सार्वजनिक जगहों पर उपलब्ध डिफिब्रिलेटर और लोगों को इसकी जानकारी होने से अचानक आए हार्ट अटैक में मौत का खतरा कम किया जा सकता है।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए क्या करें
विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक से बचाव इलाज जितना ही जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित और कम वसा वाला आहार, धूम्रपान और शराब से दूरी, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखना हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। जिन लोगों के परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास है, उन्हें नियमित जांच जरूर करानी चाहिए।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। हार्ट अटैक या किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें। न्यूजबैग इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय की जिम्मेदारी नहीं लेता।
