
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार की सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत की है। यह योजना राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका मकसद है – महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना, उनकी जागरूकता बढ़ाना और समाज को एक नई दिशा देना।
अभियान की शुरुआत
राजधानी रांची में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला समूह, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
सीएम सोरेन ने कहा –
“यदि नारी स्वस्थ होगी तो परिवार सशक्त होगा और यदि परिवार सशक्त होगा तो समाज और राज्य मजबूत होगा। यही इस अभियान का मूल मंत्र है।”

अभियान का उद्देश्य
1. महिलाओं में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना।
2. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को मुफ्त स्वास्थ्य परामर्श और जांच उपलब्ध कराना।
3. गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना।
4. पोषण, स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
5. महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
कार्यक्रम के तहत मिलने वाली सुविधाएँ
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: गाँव-गाँव और शहरों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे।
ब्लड टेस्ट और हेल्थ चेकअप: महिलाओं का हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य जांच मुफ्त की जाएगी।
स्वास्थ्य कार्ड वितरण: प्रत्येक महिला को डिजिटल स्वास्थ्य कार्ड मिलेगा, जिसमें उनकी मेडिकल हिस्ट्री दर्ज होगी।
पोषण किट: गर्भवती और जरूरतमंद महिलाओं को पोषण किट उपलब्ध कराई जाएगी।
जनजागरूकता अभियान: आंगनबाड़ी केंद्रों और महिला समूहों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
अभियान का महत्व
भारत में महिलाओं का स्वास्थ्य हमेशा से एक बड़ी चिंता का विषय रहा है।
एनएफएचएस (National Family Health Survey) की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 60% से अधिक महिलाएँ एनीमिया की शिकार हैं।
ग्रामीण इलाकों में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत का खतरा अब भी बना हुआ है।
पोषण और स्वच्छता की कमी के कारण महिलाएँ कई बीमारियों से जूझती रहती हैं।
ऐसे में ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
हेमंत सोरेन की सोच
हेमंत सोरेन हमेशा से ही महिलाओं के उत्थान और सामाजिक सशक्तिकरण की वकालत करते आए हैं।
उनकी सरकार ने पहले भी ‘सखी मंडल’, ‘फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’, और ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ जैसी योजनाओं के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
अब इस नए अभियान से स्वास्थ्य क्षेत्र में भी क्रांति लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सीएम का मानना है कि –
“स्वस्थ महिला ही सशक्त समाज का निर्माण कर सकती है। जब महिलाएँ मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होंगी, तब वे शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता में बेहतर योगदान देंगी।”
महिलाओं की प्रतिक्रियाएँ
रांची, हजारीबाग, देवघर और गिरिडीह जिलों की महिलाओं ने इस अभियान का स्वागत किया है।
गाँव की महिलाएँ कह रही हैं कि इससे उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी।
छात्राओं ने कहा कि उन्हें मासिक धर्म और स्वच्छता के बारे में सही जानकारी मिलेगी।
गर्भवती महिलाओं ने राहत की सांस ली कि अब उन्हें दूर-दराज के अस्पतालों तक जाने की जरूरत कम होगी।
सामाजिक संगठनों का सहयोग
कई एनजीओ और महिला संगठन इस अभियान से जुड़कर काम कर रहे हैं।
सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को इसमें विशेष भूमिका दी गई है।
महिला चिकित्सक और नर्सों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि महिलाएँ आसानी से अपनी समस्याएँ साझा कर सकें।
अभियान से संभावित लाभ
1. महिलाओं में एनीमिया और कुपोषण की कमी होगी।
2. मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) में कमी आएगी।
3. किशोरियों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ेगी।
4. परिवार और समाज का आर्थिक-सामाजिक स्तर मजबूत होगा।
5. झारखंड महिलाओं के स्वास्थ्य के मामले में रोल मॉडल बन सकता है।

चुनौतियाँ
हालांकि अभियान महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियाँ भी होंगी:
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य ढाँचे की कमी।
डॉक्टरों और नर्सों की कमी।
महिलाओं में अभी भी झिझक और सामाजिक संकोच।
योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता।
‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार की मजबूती की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह केवल एक स्वास्थ्य योजना नहीं बल्कि सामाजिक क्रांति है, जो आने वाले वर्षों में झारखंड की तस्वीर बदल सकती है।
यदि यह योजना सही ढंग से लागू होती है तो यह मॉडल पूरे देश में अपनाया जा सकता है।

