By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत चित्तौलोढीया वार्ड नंबर 34 में आज “खेल मैदान बचाओ अभियान” के तहत एक सराहनीय जनभागीदारी देखने को मिली। इस अभियान में गांव के छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और खेल मैदान को अवैध अतिक्रमण एवं ट्रैक्टर–ट्रक से हो रहे अवैध बालू उठाव से बचाने की मांग उठाई।

सुबह के समय आयोजित इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्षेत्रवासी अपने बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह खेल मैदान ही गांव के बच्चों और युवाओं के खेलने, शारीरिक विकास और सामाजिक गतिविधियों का एकमात्र स्थान है, लेकिन बीते कुछ समय से अवैध रूप से ट्रैक्टर और ट्रकों द्वारा बालू ढुलाई के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे मैदान पूरी तरह बर्बाद हो रहा है।
अवैध बालू उठाव से मैदान को भारी नुकसान
स्थानीय लोगों ने बताया कि लगातार भारी वाहनों के प्रवेश से खेल मैदान की मिट्टी खराब हो चुकी है। मैदान में गड्ढे हो गए हैं, जिससे बच्चों के खेलते समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार ग्रामीणों द्वारा मना करने के बावजूद अवैध बालू माफियाओं द्वारा ट्रैक्टर और ट्रक मैदान में प्रवेश कराए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जनभागीदारी ने दिया आंदोलन को बल
इस अभियान में लखन मंडल, दयानंद कुमार, राजू सिंह, दरोगा मंडल, इंद्रजीत राणा, चुनचुन राणा, उत्तम राणा, प्रमोद सिंह सहित गांव के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में खेल मैदान को सुरक्षित रखने की मांग की। ग्रामीणों ने मैदान में खड़े होकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और यह स्पष्ट किया कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे। लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर “खेल मैदान बचाओ”, “अवैध बालू उठाव बंद करो”, “बच्चों का भविष्य बचाओ” जैसे नारे लगाए।
नगर निगम से बाउंड्री वॉल की मांग
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि नगर निगम द्वारा खेल मैदान की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) जल्द से जल्द कराई जाए, ताकि किसी भी प्रकार के वाहन का प्रवेश पूरी तरह से रोका जा सके। साथ ही मैदान को खेल योग्य बनाने के लिए समतलीकरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम सुदूर इलाकों से भी टैक्स वसूली करती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी मुहैया नहीं कराया जा रहा है। 42 गांवों को नगर निगम क्षेत्र में शामिल किए जाने के बावजूद आज तक इन इलाकों में बुनियादी विकास कार्य नहीं हो पाए हैं।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी आज तक किसी भी विधायक या जनप्रतिनिधि द्वारा खेल मैदान जैसी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया। लोगों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर सिर्फ घोषणाएं होती हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिखता। यदि समय रहते खेल मैदान को नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ी के पास खेलने के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा।
आंदोलन की चेतावनी
अभियान के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि खेल मैदान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक मैदान का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों और युवाओं के भविष्य का सवाल है। यदि प्रशासन उनकी मांगों को अनदेखा करता है, तो वे बड़े स्तर पर जनआंदोलन छेड़ेंगे।
बच्चों और युवाओं के भविष्य का सवाल
खेल मैदान केवल खेलने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का केंद्र होता है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि मैदान सुरक्षित रहेगा, तभी युवा पीढ़ी खेलों से जुड़ पाएगी और नशा जैसी बुराइयों से दूर रह सकेगी।
अभियान में शामिल लोगों ने जिला प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर अवैध बालू उठाव पर रोक लगाने और खेल मैदान को संरक्षित करने की मांग की है।

