By: Vikash Kumar (Vicky)

देवघर। आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतरकर अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं। इसी क्रम में देवघर पहुंचे झारखंड सरकार के पूर्व कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने बंगाल चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन निश्चित है और भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

रणधीर सिंह ने कहा कि जिस तरह से एसएआर (स्पेशल एनालिसिस रिपोर्ट) के माध्यम से लगभग 90 लाख फर्जी वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उससे यह स्पष्ट हो जाता है कि अब तक राज्य में किस प्रकार चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में फर्जी वोटरों के सहारे सरकार बनाई गई थी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की जनता अब जागरूक हो चुकी है और तृणमूल कांग्रेस के कथित कुशासन से त्रस्त है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दों ने जनता को परेशान कर दिया है, जिसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलने जा रहा है।

रणधीर सिंह ने आगे कहा कि इस बार का चुनाव पूरी तरह से बदलाव का चुनाव है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल की जनता अब विकास और सुशासन चाहती है और भाजपा को एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रही है। उनके अनुसार, भाजपा को इस बार स्पष्ट जनादेश मिलने जा रहा है और राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।
बंगाल चुनाव के साथ-साथ उन्होंने असम की राजनीति पर भी टिप्पणी की। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम दौरे को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। रणधीर सिंह ने कहा कि झारखंड में जहां महागठबंधन के तहत सरकार चल रही है, वहीं असम में झामुमो अकेले चुनाव लड़ रहा है, जो पूरी तरह से असंगत और अप्रासंगिक है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असम में झामुमो का चुनाव लड़ना सिर्फ औपचारिकता है और इसका कोई राजनीतिक आधार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी का यह दौरा चुनावी रणनीति कम और व्यक्तिगत यात्रा अधिक प्रतीत होता है।
रणधीर सिंह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से वे झारखंड चुनाव में सक्रिय थे, उसी का जवाब देने की मानसिकता से हेमंत सोरेन असम में सक्रिय हो रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक ईर्ष्या का परिणाम बताया।

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि असम में झामुमो को एक भी सीट मिलने की संभावना नहीं है। उनके अनुसार, राज्य की जनता झामुमो को गंभीर राजनीतिक विकल्प के रूप में नहीं देखती है और वहां की राजनीति पूरी तरह से अलग परिप्रेक्ष्य में चल रही है।

देवघर में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जहां भाजपा समर्थक इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे चुनावी बयानबाजी करार दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल चुनाव इस बार काफी रोचक और कड़े मुकाबले वाला होगा। एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में जुटी है, वहीं भाजपा पूरे दमखम के साथ सत्ता हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं और जनता किसे अपना समर्थन देती है। फिलहाल, नेताओं के बयान और चुनावी तैयारियों ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

