by-vikash kumar (vicky)
Bhaumvati Amavasya 2026: फाल्गुन मास की अमावस्या इस वर्ष 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है और मंगलवार के दिन होने के कारण इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब अमावस्या सोमवार, मंगलवार या गुरुवार को आती है तो उसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। मंगलवार को भौम ग्रह यानी मंगल का दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन पड़ने वाली अमावस्या को विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या पितृ तर्पण, स्नान-दान, श्राद्ध और हनुमान उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फाल्गुन अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास को संवत्सर का अंतिम महीना माना जाता है। इस मास की अमावस्या को फाल्गुनी अमावस्या भी कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, विशेषकर गंगा स्नान, पितरों के निमित्त तर्पण और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भौमवती अमावस्या और मंगल ग्रह का संबंध
मंगल ग्रह को साहस, भूमि, ऊर्जा और ऋण मुक्ति का कारक माना गया है। मंगलवार को आने वाली अमावस्या पर हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से मंगल दोष शांत होता है, कर्ज से मुक्ति मिलती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। जो लोग लंबे समय से आर्थिक संकट या ऋण से परेशान हैं, उनके लिए यह दिन विशेष उपाय करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
भौमवती अमावस्या 2026 तिथि और मुहूर्त
अमावस्या तिथि का आरंभ 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा।
अमावस्या तिथि का समापन 17 फरवरी 2026 को सुबह 5 बजकर 30 मिनट पर होगा।
ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 05:26 से 06:16 तक रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:29 से 01:16 तक रहेगा।
विजय मुहूर्त दोपहर 02:48 से 03:34 तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त शाम 06:37 से 07:02 तक रहेगा।
अमृत काल 10:39 से 12:17 तक रहेगा।
इन शुभ मुहूर्तों में स्नान, दान, जप और पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

भौमवती अमावस्या पर क्या करें
भौमवती अमावस्या के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पितरों का तर्पण करें। तिल, जल और कुश से पिंडदान करना शुभ माना गया है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल और धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन हनुमान जी के मंदिर में जाकर सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करना मंगलकारी माना जाता है। मंगल के बीज मंत्र का जाप और हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।

धन-धान्य वृद्धि के लिए उपाय
मान्यता है कि भौमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने और पितरों के नाम से अन्न दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। कर्ज मुक्ति के लिए हनुमान जी को गुड़ और चना अर्पित करना तथा मंगल मंत्र का जाप करना लाभकारी बताया गया है। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा भाव से दान और पूजा करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पितृ दोष से मुक्ति का अवसर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। भौमवती अमावस्या के दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है। पूर्वजों की कृपा से परिवार में शांति, समृद्धि और उन्नति के योग बनते हैं।

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। स्थान और समय के अनुसार तिथि व मुहूर्त में अंतर संभव है। किसी भी विशेष अनुष्ठान या ज्योतिषीय उपाय से पहले योग्य पंडित या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

