By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर (झारखंड) का प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन ‘अट्ठे मटन’ को Geographical Indication (GI) टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। GI टैग मिलने के बाद यह डिश न सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान पाएगी।

GI Tag क्या होता है और क्यों महत्वपूर्ण
GI टैग एक प्रकार का भौगोलिक पहचान चिन्ह होता है, जो किसी उत्पाद को उसके स्थानीय, सांस्कृतिक और विशिष्ट गुणवत्ता के कारण मिलता है। इससे उत्पाद की असली पहचान सुरक्षित रहती है और नकल या नकली प्रोडक्ट से अलग पहचाना जा सकता है। GI टैग मिलने के बाद देवघर का अट्ठे मटन ब्रांडेड और प्रमोटेड किया जा सकेगा और इससे स्थानीय व्यवसायियों को भी फायदा मिलेगा।
अट्ठे मटन की खासियत क्या है
अट्ठे मटन अन्य मटन डिशों से काफी अलग है। इसे प्याज, लहसुन और पानी के बिना बनाया जाता है और बनाने की प्रक्रिया भी पारंपरिक है। इसे शुद्ध देसी घी में लगभग तीन घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है जिससे इसका स्वाद बेहद विशिष्ट और सुगंधित होता है।
खाद्य संस्कृति और स्थानीय पहचान
अट्ठे मटन का स्वाद और पकाने की विधि न केवल एक व्यंजन की विशेषता है बल्कि यह देवघर की खानपान संस्कृति और स्थानीय पहचान का प्रतीक भी है। इस डिश का खास स्थान त्योहारों, मेहमानों के स्वागत और पारिवारिक अवसरों में होता है। GI टैग इसे संरक्षित सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करेगा।

राज्य में अन्य GI Tag प्रयास
यह पहला अवसर नहीं है जब झारखंड में GI टैग के लिए आवेदन किया जाता है। पहले सोहराई पेंटिंग को GI टैग मिला है और अब अट्ठे मटन सहित अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी GI टैग दिलाने की दिशा में काम चल रहा है। इससे राज्य के हस्तशिल्प, खाद्य और सांस्कृतिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान और अवसर मिलेगा।
स्थानीय व्यापारियों और लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय होटल संचालक और मटन व्यवसाय इससे उत्साहित हैं। उनका कहना है कि GI टैग मिलने से व्यापार में वृद्धि, पर्यटकों की रुचि और स्थानीय प्रतिभाओं को मान्यता मिलेगी। इससे देवघर के पारंपरिक खानपान को नई दिशा और पहचान मिलेगी।
यह खबर उपलब्ध समाचार स्रोतों पर आधारित है। GI टैग की अंतिम स्वीकृति और मान्यता संबंधित सरकारी निकाय द्वारा प्रदान की जाती है और प्रक्रिया में समय लग सकता है।

