By: Vikash Kumar (Vicky)
सनातन परंपरा का प्राचीन महत्व
सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि सदियों से लोग पीपल के नीचे दीपक जलाते आए हैं। मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे किया गया पूजन सीधे देवताओं तक पहुंचता है और साधक को शीघ्र फल मिलता है।

शनिवार और अमावस्या का विशेष संयोग
पीपल के नीचे दीपक जलाने का महत्व विशेष रूप से शनिवार और अमावस्या के दिन बढ़ जाता है। कहा जाता है कि इन दिनों दीप जलाने से शनि दोष, पितृ दोष और ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है। कई लोग शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करते हैं, जिससे जीवन में स्थिरता आती है।
पितृ शांति और मोक्ष की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि पीपल के नीचे दीप जलाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। यही कारण है कि श्राद्ध पक्ष, अमावस्या और विशेष तिथियों पर लोग यहां दीप दान करते हैं। इसे पितृ तर्पण का सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है।
मनोकामना पूर्ति का रहस्य
आस्था है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार 7 या 11 शनिवार तक पीपल के नीचे दीप जलाए और मन में सच्ची श्रद्धा रखे तो उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेषकर विवाह, नौकरी, धन और संतान से जुड़ी समस्याओं में इसे अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी समझें
वैज्ञानिक रूप से भी पीपल का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन देता है, जो मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। शाम के समय दीप जलाने से वातावरण में शुद्धता आती है और मन को स्थिरता मिलती है। इसलिए यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन से भी जुड़ी मानी जाती है।
दीप जलाने का सही तरीका
पीपल के नीचे दीप जलाते समय पहले जल अर्पित करें, फिर घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद तीन या सात परिक्रमा करें और मन ही मन प्रार्थना करें। दीप जलाने के बाद जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करना और भी शुभ माना जाता है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक आस्थाओं पर आधारित है। इसे अंतिम सत्य न मानें। किसी भी धार्मिक या ज्योतिषीय उपाय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

