By: Vikash Kumar (Vicky)
नींद की कमी क्यों बन रही है बड़ी स्वास्थ्य समस्या
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग खानपान पर तो ध्यान देने लगे हैं, लेकिन नींद को अब भी हल्के में लिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार 6 घंटे से कम नींद लेना शरीर के लिए उतना ही नहीं, बल्कि कई मामलों में खराब डाइट से भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। नींद की कमी धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती है और गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है।

शरीर की रिकवरी नींद में ही होती है
नींद केवल आराम का समय नहीं होती, बल्कि इसी दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है। मांसपेशियों की मरम्मत, हार्मोन बैलेंस और इम्यून सिस्टम की मजबूती नींद के दौरान ही होती है। जब व्यक्ति रोजाना 6 घंटे से कम सोता है, तो शरीर को पूरी तरह रिकवर होने का मौका नहीं मिलता, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।
दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा
लगातार कम नींद लेने वालों में हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नींद की कमी से तनाव हार्मोन बढ़ता है, जो दिल की धड़कनों और रक्तचाप को प्रभावित करता है। कई रिसर्च में पाया गया है कि कम सोने वाले लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम ज्यादा होता है।
डायबिटीज और मोटापे से सीधा संबंध
6 घंटे से कम नींद लेने से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा नींद की कमी भूख बढ़ाने वाले हार्मोन को सक्रिय कर देती है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा होती है और वजन तेजी से बढ़ सकता है। यही कारण है कि नींद की कमी को मोटापे का बड़ा कारण माना जाता है।

दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
नींद पूरी न होने से दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, फोकस की कमी और निर्णय लेने में परेशानी इसके आम लक्षण हैं। लंबे समय तक नींद की कमी डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं को जन्म दे सकती है।
इम्यून सिस्टम हो जाता है कमजोर
जब शरीर को पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति जल्दी बीमार पड़ता है और छोटी-छोटी बीमारियां भी लंबे समय तक ठीक नहीं होतीं। यही वजह है कि नींद की कमी को कई विशेषज्ञ “साइलेंट किलर” कहते हैं।
समय से पहले मौत का बढ़ता जोखिम
अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि जो लोग लंबे समय तक रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें समय से पहले मौत का खतरा अधिक होता है। यह खतरा दिल की बीमारी, स्ट्रोक और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर जैसी समस्याओं के कारण बढ़ता है।
कितनी नींद है जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए। बच्चों, किशोरों और बुजुर्गों के लिए नींद की जरूरत अलग-अलग हो सकती है, लेकिन 6 घंटे से कम नींद को किसी भी उम्र में सुरक्षित नहीं माना जाता।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और विभिन्न अध्ययनों पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या नींद से जुड़ी परेशानी के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

