By: Vikash Kumar (Vicky)
लोहड़ी क्या है और क्यों मनाई जाती है
लोहड़ी भारत के उत्तर भागों, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मनाया जाने वाला प्रमुख लोकपर्व है। यह त्योहार जनवरी के मध्य में आता है, जब सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ता है और नई फसल का मौसम शुरू होता है। यह किसानों के लिए आभार और उत्सव का प्रतीक माना जाता है।

लोहड़ी नाम की उत्पत्ति कैसे हुई
लोहड़ी नाम को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे संत कबीर की पत्नी ‘लोई’ से जोड़ते हैं, जबकि कई विद्वान इसे ‘लोह’ यानी अग्नि से जोड़ते हैं। इस पर्व में आग की पूजा और उसकी परिक्रमा की जाती है, इसलिए यह नाम इससे जुड़ गया।
दुल्ला भट्टी की कहानी क्यों जुड़ी है लोहड़ी से
लोहड़ी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा दुल्ला भट्टी की है, जिन्हें पंजाब का रॉबिन हुड कहा जाता है। उन्होंने मुगल काल में गरीब लड़कियों की रक्षा की और उनकी शादी करवाई। आज भी लोहड़ी के गीतों में उनका नाम श्रद्धा से लिया जाता है।

अग्नि का लोहड़ी में क्या महत्व है
लोहड़ी की शाम जलाया जाने वाला अलाव शुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लोग इसमें तिल, गुड़, मूंगफली और रेवड़ी अर्पित कर सूर्य और अग्नि देव से समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
सामूहिक उत्सव क्यों है लोहड़ी
लोहड़ी केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्सव भी है। लोग एक साथ मिलकर गीत गाते हैं, भांगड़ा और गिद्धा करते हैं और पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं, जिससे आपसी मेलजोल और भाईचारा बढ़ता है।
आधुनिक समय में लोहड़ी का महत्व
आज भी लोहड़ी लोगों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ती है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ तालमेल, सामूहिकता और सकारात्मक सोच से जीवन में खुशहाली आती है।
यह लेख लोक मान्यताओं और ऐतिहासिक संदर्भों पर आधारित है। विभिन्न क्षेत्रों में परंपराओं में अंतर हो सकता है।

