By: Vikash Kumar (Vicky)
क्या है साइलेंट थकान सिंड्रोम
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बहुत से लोग बिना किसी गंभीर बीमारी के भी लगातार थकान महसूस करते हैं। डॉक्टर इसे अनौपचारिक रूप से “साइलेंट थकान सिंड्रोम” यानी ऐसी थकान कहते हैं जो दिखती नहीं, लेकिन शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित करती है। व्यक्ति दिखने में सामान्य रहता है, लेकिन भीतर से ऊर्जा की कमी, सुस्ती और चिड़चिड़ापन महसूस करता है।

क्यों बढ़ रही है यह समस्या
डिजिटल लाइफस्टाइल, देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल, असंतुलित आहार और पर्याप्त नींद की कमी इसके मुख्य कारण हैं। लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। इसके अलावा तनाव, मल्टीटास्किंग और काम का दबाव शरीर की ऊर्जा को धीरे-धीरे खत्म करता रहता है।

साइलेंट थकान के प्रमुख लक्षण
बार-बार सिरदर्द होना, बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस करना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, नींद पूरी होने के बाद भी सुस्ती रहना, मूड स्विंग और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। कई लोग इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है।
महिलाओं और युवाओं में ज्यादा असर
हाल के वर्षों में यह समस्या खासतौर पर कामकाजी महिलाओं, छात्रों और आईटी या डिजिटल फील्ड में काम करने वाले युवाओं में अधिक देखी जा रही है। घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारियां, पढ़ाई का दबाव और सोशल मीडिया की लत शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डालती है।

कैसे करें बचाव
सबसे पहले अपनी नींद को प्राथमिकता दें। रोज कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है। हर 45 से 60 मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 5 से 10 मिनट का ब्रेक लें। भोजन में हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन और पर्याप्त पानी शामिल करें। रोजाना 20 से 30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज या योग शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
डिजिटल डिटॉक्स भी बेहद जरूरी है। दिन में कम से कम एक घंटा बिना मोबाइल या लैपटॉप के बिताएं। परिवार के साथ समय बिताना और प्रकृति के संपर्क में रहना मानसिक ताजगी देता है।

कब लें डॉक्टर की सलाह
अगर लगातार कई हफ्तों तक थकान बनी रहे, वजन में अचानक बदलाव हो, बाल झड़ना बढ़ जाए या दिल की धड़कन तेज महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार यह थायरॉयड, विटामिन डी या आयरन की कमी का संकेत भी हो सकता है।
जीवनशैली में छोटे बदलाव, बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव जैसे समय पर सोना, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम इस समस्या से काफी हद तक बचा सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना जरूरी है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है। यदि समय रहते संकेतों को समझ लिया जाए तो साइलेंट थकान सिंड्रोम से आसानी से बचा जा सकता है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक समस्या होने पर स्वयं उपचार न करें और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

