By: Vikash Kumar (Vicky)
आज का पंचांग और तिथि का महत्व
27 फरवरी 2026, शुक्रवार को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। यह एकादशी विशेष रूप से रंगभरी एकादशी के नाम से जानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजन और भगवान विष्णु की आराधना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। फाल्गुन मास की यह तिथि होली से पहले आने वाली महत्वपूर्ण तिथियों में से एक मानी जाती है।

रंगभरी एकादशी का धार्मिक महत्व
रंगभरी एकादशी का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भक्त भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित कर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और दांपत्य सौख्य की कामना करते हैं। कई धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शोभायात्रा का आयोजन किया जाता है।

चंद्रमा का मिथुन राशि में गोचर
आज चंद्रमा मिथुन राशि में संचरण करेंगे। मिथुन राशि के स्वामी बुध देव माने जाते हैं, जो बुद्धि, वाणी और व्यापार के कारक ग्रह हैं। चंद्रमा का इस राशि में होना मानसिक सक्रियता, विचारों की तेजी और संवाद क्षमता में वृद्धि का संकेत देता है। लेखन, शिक्षा, मीडिया और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय अनुकूल माना जा सकता है।
आर्द्रा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग
आज के दिन आर्द्रा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। आर्द्रा नक्षत्र परिवर्तन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही आयुष्मान योग का भी निर्माण हो रहा है, जिसे शुभ योगों में गिना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, व्रत-पूजन और दान-पुण्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।

अभिजीत मुहूर्त का शुभ समय
शुक्रवार को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में अभिजीत मुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत शुभ समय माना गया है। इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत, महत्वपूर्ण निर्णय, निवेश या शुभ कार्य करना लाभकारी हो सकता है।
राहुकाल का समय
आज राहुकाल सुबह 11:00 बजे से 12:26 बजे तक रहेगा। ज्योतिष मान्यता के अनुसार राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। हालांकि नियमित दैनिक कार्य और पूजा-पाठ इस समय भी किए जा सकते हैं।

व्रत और पूजा का विशेष महत्व
एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली अपनाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन करना भी शुभ माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से दिन का प्रभाव
मिथुन राशि में चंद्रमा का गोचर मानसिक चंचलता को बढ़ा सकता है, इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय धैर्य और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। व्यापार और शिक्षा से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। दिन का समुचित उपयोग करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

यह पंचांग सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थान और व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार तिथि, मुहूर्त और फल में परिवर्तन संभव है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

