By:Vikash Kumar (Vicky)
रोटी को क्यों माना गया है अन्नपूर्णा का स्वरूप
भारतीय घरों में रोटी केवल भोजन नहीं बल्कि अन्नपूर्णा देवी का स्वरूप मानी जाती है। हमारे यहां रसोई को मंदिर जैसा पवित्र माना गया है और रोटी बनाने की प्रक्रिया को भी एक पवित्र कर्म समझा जाता है। वास्तु शास्त्र और परंपराओं के अनुसार रोटी बनाते समय की गई छोटी-छोटी गलतियां भी घर की सुख-शांति और आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। इन्हीं नियमों में एक महत्वपूर्ण नियम है कि रोटी बनाते समय उसे गिनना नहीं चाहिए।

रोटी गिनने से क्यों आती है धन की कमी
वास्तु शास्त्र के अनुसार जब कोई व्यक्ति रोटी बनाते समय उन्हें गिनता है, तो उसका ध्यान अन्न की कमी और बचत की सोच पर चला जाता है। यह भावना ब्रह्मांड को संकेत देती है कि घर में अभाव है। धीरे-धीरे यही सोच जीवन में आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी का कारण बन सकती है।
रोटी बनाते समय मन की स्थिति क्यों जरूरी है
रोटी बनाते समय व्यक्ति के मन की भावना सीधे भोजन में प्रवेश करती है। यदि मन में गुस्सा, तनाव या चिंता होती है, तो वही नकारात्मक ऊर्जा भोजन में समा जाती है। इससे परिवार में झगड़े, बीमारी और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

अन्न के प्रति कृतज्ञता का भाव क्यों जरूरी है
रोटी को गिनने से अन्न के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता कम हो जाती है। भारतीय परंपरा में अन्न को भगवान का प्रसाद माना गया है। जब हम रोटी को संख्या में गिनते हैं, तो उसका आध्यात्मिक महत्व घट जाता है और वह केवल एक वस्तु बन जाती है।
रसोई की ऊर्जा घर के भाग्य को कैसे बदलती है
वास्तु के अनुसार रसोई घर की समृद्धि का केंद्र होती है। साफ रसोई, शांत मन और सकारात्मक सोच से बना भोजन पूरे परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
जली या टूटी रोटी क्यों मानी जाती है अशुभ
वास्तु शास्त्र के अनुसार जली हुई या टूटी हुई रोटी परोसना घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इससे पारिवारिक विवाद, धन हानि और असंतोष बढ़ सकता है।
यह लेख वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है। किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

