By: Vikash Kumar (Vicky)
Book Reader’s अक्सर कहते हैं कि किताबों की खुशबू में एक अलग ही सुकून होता है। नई किताब खोलते ही जो हल्की सी महक आती है या फिर पुरानी किताबों से उठती मिट्टी और लकड़ी जैसी खुशबू—दोनों का अनुभव अलग होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर किताबों से ये गजब की महक क्यों आती है? इसके पीछे भावनाएं ही नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक कारण छिपा है। आइए जानते हैं किताबों की खुशबू का असली राज।

नई किताबों से क्यों आती है अलग खुशबू
जब आप नई किताब खरीदते हैं और उसके पन्ने पलटते हैं, तो एक ताजी सी महक महसूस होती है। दरअसल यह खुशबू कागज, स्याही और गोंद में मौजूद रसायनों के कारण आती है। किताब बनाने में लकड़ी के गूदे से कागज तैयार किया जाता है, जिसमें लिग्निन नामक तत्व पाया जाता है। इसके अलावा प्रिंटिंग इंक और बाइंडिंग गोंद में मौजूद ऑर्गेनिक कंपाउंड्स हवा के संपर्क में आकर धीरे-धीरे वाष्पित होते हैं, जिससे वह खास महक पैदा होती है।

नई किताबों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स जैसे बेंजीन डेरिवेटिव्स और अन्य वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स मिलकर वह फ्रेश स्मेल बनाते हैं, जिसे कई लोग बहुत पसंद करते हैं। यही वजह है कि नई किताब की खुशबू अलग और तीव्र होती है।

पुरानी किताबों की खुशबू क्यों लगती है खास
पुरानी किताबों से आने वाली महक बिल्कुल अलग होती है। यह खुशबू थोड़ी मीठी, लकड़ी जैसी या कभी-कभी हल्की सी वनीला जैसी लग सकती है। इसका कारण है समय के साथ कागज में मौजूद लिग्निन और सेल्यूलोज का टूटना। जब ये तत्व ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया से गुजरते हैं, तो कई प्रकार के रासायनिक यौगिक बनते हैं, जो हवा में मिलकर विशेष गंध पैदा करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार पुरानी किताबों की खुशबू में वनीलिन जैसे कंपाउंड भी शामिल हो सकते हैं, जो वनीला जैसी महक देते हैं। यही कारण है कि लाइब्रेरी या पुराने बुक स्टोर में प्रवेश करते ही एक अलग तरह की सुगंध महसूस होती है, जो कई लोगों के लिए यादों से जुड़ी होती है।

किताबों की महक और हमारी भावनाएं
किताबों की खुशबू सिर्फ रसायनों का खेल नहीं है, यह हमारे दिमाग और यादों से भी जुड़ी होती है। जब हम किसी खास गंध को महसूस करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क उसे किसी अनुभव या भावना से जोड़ देता है। बचपन की पढ़ाई, लाइब्रेरी का माहौल या किसी खास किताब से जुड़ी यादें उस खुशबू को और भी खास बना देती हैं।
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि गंध और यादों का गहरा संबंध होता है। इसलिए किताबों की महक हमें सुकून और अपनापन महसूस कराती है।

क्या डिजिटल किताबों में नहीं होती ये बात
आज के डिजिटल दौर में ई-बुक और ऑडियोबुक का चलन बढ़ गया है, लेकिन असली किताब की खुशबू का अनुभव डिजिटल माध्यम में नहीं मिल सकता। यही वजह है कि कई लोग अब भी हार्डकॉपी किताबें खरीदना पसंद करते हैं। किताब की खुशबू, पन्नों की सरसराहट और उसे हाथ में पकड़ने का एहसास पढ़ने के अनुभव को खास बना देता है।
क्या किताबों की महक सेहत के लिए सुरक्षित है
आम तौर पर नई या पुरानी किताबों की खुशबू से कोई गंभीर नुकसान नहीं होता, लेकिन बहुत अधिक धूल या फफूंद लगी किताबें एलर्जी का कारण बन सकती हैं। इसलिए पुरानी किताबों को साफ और सूखी जगह पर रखना जरूरी है। यदि किसी को अस्थमा या एलर्जी की समस्या है तो धूल भरे वातावरण से बचना चाहिए।

कुल मिलाकर किताबों की महक विज्ञान और भावनाओं का अनोखा संगम है। नई किताब की ताजगी और पुरानी किताब की यादों भरी खुशबू दोनों ही पाठकों के लिए खास अनुभव बनाती हैं।
यह लेख सामान्य वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित है। यदि आपको किसी प्रकार की एलर्जी या श्वसन संबंधी समस्या है तो चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

